देहरादून, 26 जनवरी । उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के विभिन्न प्रावधानों में सुधार के लिए लाया गया संशोधन अध्यादेश सोमवार को लागू कर दिया गया। इस अध्यादेश के तहत विवाह और सहवासी (लिव-इन) संबंधों में बल, दबाव और धोखाधड़ी जैसे कृत्यों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं। अध्यादेश में करीब डेढ़ दर्जन महत्वपूर्ण संशोधन शामिल हैं।
उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह की स्वीकृति मिलने के बाद तत्काल प्रभाव से लागू किया गया। राज्य सरकार ने यूसीसी-2024 के प्रावधानों को अधिक स्पष्ट, प्रभावी और व्यावहारिक बनाने के उद्देश्य से यह अध्यादेश पेश किया था।
सरकार के अनुसार, इन संशोधनों का मकसद प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करना और नागरिकों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अध्यादेश में विवाह के समय पहचान से संबंधित गलत प्रस्तुति को विवाह निरस्तीकरण का आधार बनाया गया है। साथ ही विवाह और सहवासी संबंधों में बल, दबाव, धोखाधड़ी या अन्य विधि-विरुद्ध कृत्यों के लिए सख्त दंड का प्रावधान किया गया है।
संशोधन के तहत सहवासी संबंध समाप्त होने पर पंजीयक द्वारा समाप्ति प्रमाण पत्र जारी किए जाने का प्रावधान जोड़ा गया है। इसके अलावा, कानून में प्रयुक्त “विधवा” शब्द को “जीवनसाथी” से प्रतिस्थापित किया गया है। विवाह, तलाक, सहवासी संबंध और उत्तराधिकार से जुड़े पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति अब महापंजीयक को प्रदान की गई है।
अध्यादेश में कानूनी प्रक्रियाओं को भी अद्यतन किया गया है। आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 के स्थान पर अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 लागू की गई है, जबकि दंडात्मक प्रावधानों के लिए भारतीय न्याय संहिता, 2023 को प्रभावी किया गया है। साथ ही, यदि उप-पंजीयक निर्धारित समय-सीमा में कार्रवाई नहीं करता है, तो संबंधित प्रकरण स्वतः पंजीयक और महापंजीयक को अग्रेषित किए जाने का प्रावधान किया गया है।
संशोधन अध्यादेश में उप-पंजीयक पर लगाए गए दंड के विरुद्ध अपील का अधिकार भी दिया गया है और दंड की वसूली भू-राजस्व की तरह किए जाने का प्रावधान जोड़ा गया है।
गौरतलब है कि उत्तराखंड स्वतंत्र भारत में समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य है। प्रदेश में 27 जनवरी 2025 को यूसीसी लागू की गई थी, जिसके बाद अब इसके प्रावधानों में यह महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं।
