इंदौर जल त्रासदी पर कांग्रेस का हमला, सुप्रीम कोर्ट स्तर की स्वतंत्र जांच की मांग

नयी दिल्ली, आठ जनवरी । कांग्रेस ने इंदौर में दूषित पानी के कारण हुई मौतों को लेकर मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है और मामले की उच्चतम न्यायालय स्तर पर स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। पार्टी ने कहा कि इस त्रासदी ने राज्य सरकार की घोर लापरवाही, अक्षमता और असंवेदनशीलता को उजागर कर दिया है।

कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि इंदौर में दूषित पेयजल की आपूर्ति के कारण छह माह के एक शिशु सहित 18 निर्दोष लोगों की जान चली गई, जबकि 40,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और कई मरीज अब भी आईसीयू में भर्ती हैं। उन्होंने कहा कि यह विडंबना है कि वही इंदौर शहर, जिसे लगातार आठवीं बार देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया, सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में पूरी तरह विफल रहा।

खेड़ा ने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ का दावा करने वाली भाजपा सरकार अपने सबसे बुनियादी कर्तव्य—स्वच्छ और सुरक्षित पानी—को सुनिश्चित करने में नाकाम रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि संवेदना और जवाबदेही दिखाने के बजाय सरकार ने अहंकारी रवैया अपनाया है। उन्होंने मध्यप्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की कथित टिप्पणी का भी जिक्र करते हुए कहा कि इससे पत्रकारों और पीड़ित परिवारों का अपमान हुआ है।

सरकार द्वारा प्रति पीड़ित दो लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा पर सवाल उठाते हुए खेड़ा ने कहा कि यह राशि मानव जीवन की कीमत का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की उदासीनता के कारण पीड़ित परिवारों को जीवन भर इस त्रासदी का दर्द झेलना पड़ेगा।

कांग्रेस नेता ने मांग की कि इस मामले की तत्काल जांच के आदेश प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा दिए जाएं और भाजपा सरकार को जवाबदेह ठहराने के लिए उच्चतम न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यह घटना केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि दशकों से चली आ रही व्यवस्थागत विफलता का परिणाम है।

खेड़ा ने आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत अभियान जैसे कार्यक्रमों के बावजूद राज्य में तिमाही जल गुणवत्ता परीक्षण नहीं किए गए, निगरानी रिपोर्ट तैयार नहीं हुईं और अहम बुनियादी ढांचा परियोजनाएं अधूरी रहीं। उन्होंने कहा कि एशियाई विकास बैंक से मिले करोड़ों डॉलर के ऋण के बावजूद सरकार अपने दायित्व निभाने में विफल रही है।

कांग्रेस ने सवाल उठाया कि भाजपा की लापरवाही से हुई इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा और मासूम बच्चों की जान जाने के बाद भी मुख्यमंत्री व वरिष्ठ मंत्रियों की चुप्पी कैसे उचित ठहराई जा सकती है।

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