आरएसएस 15 जनवरी से देशभर में आयोजित करेगा ‘हिंदू सम्मेलन’, शताब्दी वर्ष को ‘समाज उत्सव’ के रूप में मनाने की तैयारी

मथुरा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपनी स्थापना की शताब्दी वर्षगांठ के अवसर पर 15 जनवरी से देशव्यापी स्तर पर ‘हिंदू सम्मेलन’ आयोजित करेगा। आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। संगठन ने देशभर में एक लाख से अधिक हिंदू सम्मेलन आयोजित करने का लक्ष्य रखा है, जिनमें से लगभग 2,000 सम्मेलन ब्रज क्षेत्र में होंगे।

आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व ने शताब्दी वर्ष को ‘समाज उत्सव’ के रूप में मनाने का आह्वान किया है। इसी क्रम में पिछले वर्ष विजयदशमी के अवसर पर इन सम्मेलनों की श्रृंखला की शुरुआत की गई थी, जिसका उद्देश्य संपूर्ण हिंदू समाज को एकजुट करना है।

ब्रज प्रांत के प्रचार प्रमुख कीर्ति कुमार ने बताया कि इन सम्मेलनों का मुख्य उद्देश्य समाज में एकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश देना है। उन्होंने कहा, “हिंदू सम्मेलनों के माध्यम से समाज के सभी वर्गों को जोड़ने और आपसी संवाद को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।”

आरएसएस पदाधिकारियों के अनुसार, सम्मेलनों में सामाजिक समरसता, एकता और संगठन नेतृत्व द्वारा सुझाए गए पांच परिवर्तनकारी बिंदुओं पर चर्चा की जाएगी। संगठन का मानना है कि ये पहल सामाजिक कमियों को दूर करने और जाति व वर्ग भेद से ऊपर उठकर एक साझा हिंदू पहचान को सशक्त बनाने में सहायक होंगी।

कीर्ति कुमार ने बताया कि ब्रज प्रांत में 15 जनवरी से 15 फरवरी के बीच आरएसएस द्वारा निर्धारित 12 जिलों में हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इन सम्मेलनों में प्रांतीय, क्षेत्रीय और जिला स्तर के पदाधिकारी भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि ब्रज प्रांत के 12 जिलों में करीब 2,000 स्थानों पर सम्मेलन होंगे, जिनमें लगभग 3,000 बस्तियां और मंडल शामिल किए गए हैं। स्थानीय आयोजन समितियां 11 से 21 जनवरी के बीच तैयारियों को अंतिम रूप दे रही हैं।

सम्मेलनों में बुद्धिजीवी, शिक्षक, चिकित्सक, इंजीनियर, महिला प्रतिभागी, संत और अन्य प्रमुख नागरिक अपने विचार साझा करेंगे। इसके साथ ही स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा और सामुदायिक भोज के साथ सम्मेलन का समापन होगा।

मथुरा जिले को लेकर क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख जगदीश प्रसाद ने बताया कि जिले के 86 मंडलों और 76 शहरी बस्तियों में लगभग 150 हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। आरएसएस का मानना है कि इन सम्मेलनों के माध्यम से समाज में एकता, सहयोग और सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा मिलेगी।

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