अहमदाबाद 2030 राष्ट्रमंडल खेलों का संभावित मेजबान, कार्यकारी बोर्ड की सिफारिश से भारत को बड़ी उपलब्धि

नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर भारत को वैश्विक खेल मंच पर एक और बड़ी सफलता मिली है। राष्ट्रमंडल खेलों के कार्यकारी बोर्ड ने बुधवार को 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए अहमदाबाद के नाम की सिफारिश की है। यह निर्णय अंतिम मुहर के लिए 26 नवंबर को ग्लासगो में होने वाली महासभा की बैठक में रखा जाएगा, जिसे मात्र औपचारिकता माना जा रहा है।

भारत ने इससे पहले 2010 में दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की थी। अगर इस सिफारिश को मंजूरी मिलती है, तो भारत दो दशक बाद फिर से इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का आयोजन करेगा।

ओलंपिक मेजबानी के लिए रास्ता साफ

खेलों की मेजबानी का अधिकार हासिल करना भारत के 2036 ओलंपिक मेजबानी के प्रयासों को भी मजबूती देगा। अहमदाबाद ही ओलंपिक 2036 के लिए भारत का प्रस्तावित शहर है।

भारत को मेजबानी की दौड़ में नाइजीरिया से प्रतिस्पर्धा मिली थी, लेकिन कार्यकारी बोर्ड ने नाइजीरिया की महत्वाकांक्षा को 2034 खेलों के लिए “विकास रणनीति” के तहत समर्थन देने का निर्णय लिया।

अहमदाबाद की तैयारियां और बुनियादी ढांचा

राष्ट्रमंडल खेल संघ ने कहा कि तकनीकी योग्यता, खिलाड़ियों के अनुभव, बुनियादी ढांचे और संचालन जैसे मानकों पर अहमदाबाद की पेशकश मजबूत साबित हुई। शहर पहले ही राष्ट्रमंडल भारोत्तोलन चैंपियनशिप की सफल मेजबानी कर चुका है और वर्तमान में सरदार वल्लभभाई पटेल खेल एन्क्लेव जैसे आधुनिक स्पोर्ट्स हब का निर्माण चल रहा है।

यह एन्क्लेव नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम के अतिरिक्त जलीय खेल केंद्र, फुटबॉल स्टेडियम और दो इनडोर एरेना से युक्त होगा।

नेताओं और अधिकारियों की प्रतिक्रियाएं

खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने इसे भारत के खेल क्षेत्र के लिए “ऐतिहासिक क्षण” बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “दूरदर्शी नेतृत्व” को इसका श्रेय दिया।

आईओए अध्यक्ष पीटी उषा ने कहा कि 2030 के खेल भारत के लिए “असाधारण सम्मान” होंगे। उन्होंने कहा, “ये खेल भारत की आयोजन क्षमता और विकसित भारत 2047 के सपने की ओर एक ठोस कदम होंगे।”

ग्लासगो के मुकाबले विस्तृत आयोजन

ग्लासगो में 2026 राष्ट्रमंडल खेलों का बजट सीमित कर कई प्रमुख खेल जैसे बैडमिंटन, कुश्ती, निशानेबाजी और हॉकी को हटाया गया है। इसके विपरीत, आईओए ने स्पष्ट किया है कि 2030 अहमदाबाद खेलों में एक विस्तृत खेल कार्यक्रम होगा जिसमें सभी पारंपरिक खेल शामिल किए जाएंगे।

अगर यह सिफारिश मंजूरी पाती है, तो भारत के लिए यह खेल कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन क्षमता में एक नई ऊंचाई होगी।

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