अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के बीच अयोध्या में जीएसटी उपायुक्त का इस्तीफा

अयोध्या में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग के उपायुक्त प्रशांत कुमार सिंह

अयोध्या (उप्र), 27 जनवरी । प्रयागराज में ज्योतिष पीठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद के बीच अयोध्या में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग के उपायुक्त प्रशांत कुमार सिंह ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज की पवित्र भूमि से जाति और धर्म के आधार पर देश को बांटने की हालिया कोशिशों से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया।

प्रशांत कुमार सिंह ने कहा कि उन्होंने यह निर्णय सरकार, संविधान और देश के चुने हुए नेतृत्व के समर्थन में लिया है। उनके अनुसार, एक सरकारी कर्मचारी होने के नाते वह सेवा नियमों से बंधे जरूर हैं, लेकिन ऐसी घटनाओं के प्रति उदासीन रहना उनके लिए संभव नहीं था।

दरअसल, प्रयागराज में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के स्नान पर्व के दौरान माघ मेला प्रशासन और पुलिस द्वारा कथित तौर पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके अनुयायियों को गंगा में स्नान करने से रोके जाने के बाद विवाद शुरू हुआ था। इस घटना से नाराज होकर शंकराचार्य अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए थे और मेला प्रशासन व पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से माफी की मांग की थी। इसके बाद दिए गए कुछ बयानों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई।

अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए सिंह ने कहा, “पिछले कुछ दिनों से प्रयागराज की पवित्र भूमि से जाति और धर्म के आधार पर देश को बांटने की घिनौनी कोशिशें हो रही हैं। इससे मुझे गहरा दुख हुआ है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भारत के संविधान के समर्थन में है।

सिंह ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा राज्य के चुने हुए मुख्यमंत्री के खिलाफ दिए गए बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रयागराज जैसी पवित्र भूमि से संवैधानिक पद पर आसीन जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं, जो उन्हें स्वीकार्य नहीं थीं।

उन्होंने कहा, “मैं उत्तर प्रदेश के सेवा नियमों से बंधा हूं। मुझे राज्य से वेतन मिलता है और मेरा परिवार उसी पर निर्भर है, लेकिन मैं कोई भावनाहीन व्यक्ति नहीं हूं। अगर मेरे राज्य और उसके प्रमुख के खिलाफ ऐसा आचरण जारी रहता है, तो एक कर्मचारी के तौर पर अपनी संवैधानिक और सेवा सीमाओं में रहते हुए इसका विरोध करना मेरा दायित्व है।”

प्रशांत कुमार सिंह के इस इस्तीफे ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है, वहीं अविमुक्तेश्वरानंद प्रकरण को लेकर चल रहा विवाद और गहरा होता नजर आ रहा है।

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