अंबरनाथ नगर परिषद में उपाध्यक्ष चुनाव के दौरान हंगामा, भाजपा-शिवसेना पार्षद आमने-सामने

ठाणे, 12 जनवरी । अंबरनाथ नगर परिषद की आम सभा की बैठक में सोमवार को उपाध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पार्षदों के बीच तीखी बहस और नोकझोंक हो गई।

नगर परिषद में भाजपा और शिवसेना के बीच सत्ता संघर्ष पहले से जारी है। पिछले महीने हुए चुनावों में भाजपा की उम्मीदवार तेजश्री करंजुले पाटिल को परिषद अध्यक्ष चुना गया था, लेकिन उपाध्यक्ष पद का चुनाव अब नया विवाद का केंद्र बन गया है।

वर्तमान में 60 सदस्यीय अंबरनाथ नगर परिषद में शिवसेना के 27 पार्षद, भाजपा के 14, कांग्रेस के 12, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के चार और दो निर्दलीय पार्षद हैं। शुरुआत में भाजपा ने कांग्रेस के 12 और राकांपा के चार पार्षदों के समर्थन से ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ (एवीए) का गठन कर 32 सीटों का बहुमत हासिल किया था। हालांकि बाद में कांग्रेस ने अपने 12 पार्षदों को निलंबित कर दिया, जो आगे चलकर भाजपा में शामिल हो गए।

इसके बाद राजनीतिक समीकरण फिर बदले, जब राकांपा के चार पार्षदों ने भाजपा से समर्थन वापस ले लिया और शिवसेना में शामिल हो गए। इससे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की संख्या बढ़कर 32 हो गई और सदन पर उसका प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो गया।

सोमवार की बैठक के दौरान भाजपा ने एवीए के सभी घटकों को अपने उम्मीदवार प्रदीप पाटिल के पक्ष में मतदान करने के लिए व्हिप जारी किया। हालांकि राकांपा ने शिवसेना के स्थानीय विधायक डॉ. बालाजी किनीकर के नेतृत्व में इस व्हिप को खारिज कर दिया। किनीकर ने यह घोषणा भी की कि “अंबरनाथ विकास आघाड़ी का अब कोई अस्तित्व नहीं है।”

शिवसेना ने राकांपा के सदाशिव पाटिल को उपाध्यक्ष पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है। इसी मुद्दे पर बैठक के दौरान दोनों गुटों के पार्षदों के बीच तीखी बहस हुई, जो बाद में हंगामे में बदल गई। भाजपा के नाराज पार्षदों को चप्पलें लहराते और शिवसेना उम्मीदवार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए देखा गया।

उपाध्यक्ष पद के चुनाव का आधिकारिक परिणाम औपचारिक मतदान और मतगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद घोषित किया जाएगा।

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