‘ज्यादा भावुक न हों’, सीजेपी याचिका पर बोले सीजेआई सूर्यकांत

नई दिल्ली, 25 मई 2026 (यूएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने कथित “सीजेपी यानी कॉकरोच जनता पार्टी” से जुड़ी गतिविधियों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है, हालांकि फिलहाल मामले की तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया गया।

सोमवार को मामले का उल्लेख किए जाने पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि इस मुद्दे पर “ज्यादा भावुक होने” की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले में तत्काल सुनवाई की आवश्यकता नहीं दिखती, अदालत उचित समय पर इस पर विचार करेगी।

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता एनके गोस्वामी ने अदालत से कहा कि संबंधित लोग न्यायपालिका की छवि खराब कर रहे हैं। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा, “इस मामले को ज्यादा भावुक होकर न लें।”

एक अन्य वकील ने अदालत को बताया कि याचिका में कथित फर्जी वकीलों और फर्जी डिग्रियों के मामले की सीबीआई जांच की मांग की गई है। साथ ही यह भी कहा गया कि अदालत में हुई बातचीत का व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जा सकता।

याचिका में अदालत की मौखिक टिप्पणियों के कथित व्यावसायिक दोहन में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। इसके अलावा फर्जी डिग्रियों के आधार पर वकालत करने वाले लोगों की जांच कराने का भी अनुरोध किया गया है।

दरअसल, 15 मई को एक मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कुछ बेरोजगार युवाओं और फर्जी डिग्रीधारकों को लेकर टिप्पणी की थी, जिसके बाद सोशल मीडिया पर “कॉकरोच जनता पार्टी” शब्द चर्चा में आ गया। अदालत ने उस दौरान कहा था कि समाज में ऐसे “परजीवी” मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं।

पीठ ने एक याचिकाकर्ता वकील से यह भी कहा था कि “पूरी दुनिया वरिष्ठ अधिवक्ता बनने की पात्र हो सकती है, लेकिन कम से कम आप इसके पात्र नहीं हैं।” सुनवाई के दौरान अदालत ने फर्जी डिग्रियों के आधार पर पेशे में आने वालों पर चिंता जताई थी।

बाद में अपनी टिप्पणी को लेकर उठे विवाद पर सीजेआई सूर्यकांत ने सफाई भी दी। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी का गलत अर्थ निकाला गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका निशाना देश के युवा नहीं थे, बल्कि वे लोग थे जिन्होंने फर्जी और जाली डिग्रियों के जरिए प्रतिष्ठित पेशों में प्रवेश किया है।

सीजेआई ने कहा कि भारतीय युवाओं पर उन्हें गर्व है और देश का युवा वर्ग विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि यह कहना पूरी तरह गलत है कि उन्होंने युवाओं का अपमान किया।

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