धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से दिया इस्तीफा, कहा- ‘युवाशक्ति ही देश की असली ताकत’

नीट-यूजी परीक्षा विवाद और छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं से उनका मन व्यथित हुआ और छात्रों के भविष्य तथा देश की एकता को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया।

नई दिल्ली, 25 जुलाई। जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और नीट-यूजी परीक्षा विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अपने सार्वजनिक इस्तीफा संदेश में उन्होंने कहा कि “भारत की युवाशक्ति ही इस देश की असली ताकत है” और पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम ने उन्हें गहराई से व्यथित किया।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वह चार दशकों से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार से जुड़े रहे हैं तथा उनका हमेशा यह विश्वास रहा है कि मजबूत और समावेशी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें देश की सेवा का अवसर मिला, जिसके लिए वे कृतज्ञ हैं।

अपने पत्र में उन्होंने कहा कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल जांच सीबीआई को सौंपी, परीक्षा रद्द की गई और पुनः परीक्षा आयोजित कराई गई। साथ ही अगले वर्ष से परीक्षा को कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में कराने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा निष्पक्ष और सुचारु रूप से कराना रही।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही इस मामले की जिम्मेदारी ली और कभी परिस्थिति से मुंह नहीं मोड़ा। उनके अनुसार, सरकार का उद्देश्य किसी भी मेधावी छात्र के भविष्य को परीक्षा माफिया की वजह से प्रभावित नहीं होने देना था। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद भी कुछ लोगों ने छात्रों को गुमराह करने का प्रयास किया, जिससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा।

अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा कि जंतर-मंतर और देशभर में बनी स्थिति का फायदा कोई राष्ट्रविरोधी तत्व न उठा सके, किसी भी छात्र का भविष्य कानूनी उलझनों में न फंसे और विद्यार्थी अपनी पढ़ाई व करियर पर ध्यान केंद्रित कर सकें, इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र सौंपा।

उन्होंने प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी और भविष्य में भी वे देश, ओडिशा तथा युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए समर्पित रहेंगे।

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