लखनऊ, 1 जुलाई 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनाने के उद्देश्य से तैयार किए गए ‘विकसित यूपी@2047’ के संशोधित विजन दस्तावेज को अंतिम रूप दे दिया गया है। नियोजन विभाग द्वारा तैयार इस रोडमैप को नीति आयोग की सहमति मिल चुकी है। अब संबंधित विभागों और मंत्रियों से सुझाव लेने के बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
मुख्यमंत्री की स्वीकृति मिलने के बाद सभी विभागों को निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप कार्ययोजना लागू करने के निर्देश जारी किए जाएंगे। इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रारंभिक प्रस्तुतीकरण के दौरान दस्तावेज में कई महत्वपूर्ण संशोधन करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि विकसित उत्तर प्रदेश का विजन केवल एक संकल्प पत्र नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और आधारभूत विकास का व्यावहारिक रोडमैप होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए थे कि इस दस्तावेज में आम जनता, विशेषज्ञों, उद्योग संगठनों और अन्य हितधारकों के सुझावों को शामिल किया जाए। साथ ही प्रत्येक क्षेत्र के लिए अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार कर इसे जिला, शहर और ग्राम पंचायत स्तर तक प्रभावी बनाया जाए।
नियोजन विभाग ने रोडमैप को तीन चरणों में विभाजित किया है। इसके तहत वर्ष 2030 तक उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर, 2036 तक दो ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक छह ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
रोडमैप में कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र के लिए उच्च उत्पादकता आधारित विकास मॉडल तैयार किया गया है। औद्योगिक क्षेत्र में तकनीक आधारित, निर्यातोन्मुख और वैश्विक प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्र विकसित करने की रणनीति भी शामिल की गई है। इसके अलावा निवेश, रोजगार सृजन, आधारभूत संरचना, शहरी विकास, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और डिजिटल गवर्नेंस को भी प्राथमिकता दी गई है।
सरकार का मानना है कि इस विजन दस्तावेज के प्रभावी क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा तथा वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
