राम मंदिर दान विवाद को लेकर न्यायिक जांच की मांग, हाईकोर्ट में मामला लंबित

लखनऊ, 18 जून 2026 (यूएनएस)। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दानराशि में कथित गड़बड़ियों को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में सुनवाई नहीं हो सकी। मामले को तत्काल सुनवाई के लिए प्रस्तुत किया गया था, लेकिन खंडपीठ ने इसे अर्जेंट हियरिंग में नहीं लिया। अब याचिकाकर्ता को उम्मीद है कि मामले की सुनवाई सोमवार को नई डबल बेंच के समक्ष हो सकती है।

यह जनहित याचिका स्थानीय अधिवक्ता मोहित अशोक की ओर से दायर की गई है, जिसमें राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने तथा मंदिर की आय-व्यय का विशेष लेखा परीक्षण नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से कराने की मांग की गई है।

मामला न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध था। याचिका में अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि यदि जांच के दौरान प्रथम दृष्टया आपराधिक तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए जाएं।

याचिकाकर्ता का कहना है कि श्रीराम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और मंदिर के दानपात्रों में बड़ी मात्रा में नकद राशि, सोने-चांदी के आभूषण तथा अन्य बहुमूल्य वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं। ऐसे में चढ़ावे के प्रबंधन और लेखांकन प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित होना आवश्यक है। उन्होंने तर्क दिया कि हाल के दिनों में मंदिर की दानराशि और चढ़ावे में कथित गड़बड़ियों से जुड़ी खबरों ने श्रद्धालुओं के बीच चिंता पैदा की है, इसलिए पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

याचिका में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) तथा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि मंदिर में प्राप्त दान, बहुमूल्य धातुओं, आभूषणों और अन्य संपत्तियों का विस्तृत ऑडिट कराकर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।

इस बीच राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर पहले से ही विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच जारी है और राजनीतिक दलों की ओर से भी लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में हाईकोर्ट में दाखिल यह जनहित याचिका पूरे मामले को नया कानूनी आयाम देती दिखाई दे रही है। अब सभी की निगाहें सोमवार को संभावित सुनवाई पर टिकी हैं, जब अदालत इस मामले में आगे की दिशा तय कर सकती है।

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