अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने इमाम की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि याचिका में बताए गए तथ्यों और अभियोजन पक्ष द्वारा उनके सत्यापन को देखते हुए आवेदक को सीमित अवधि के लिए राहत दी जाना उचित है।
अदालत ने आदेश दिया कि शरजील इमाम केवल अपने परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और मित्रों से ही मिल सकेंगे। उन्हें याचिका में बताए गए स्थानों के अलावा कहीं और जाने की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही अदालत ने उन्हें सोशल मीडिया के इस्तेमाल से भी प्रतिबंधित किया है।
अदालत ने इमाम को 50,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही उन्हें मामले से जुड़े किसी भी गवाह या अन्य व्यक्ति से संपर्क नहीं करने को कहा गया है। अदालत ने उन्हें जांच अधिकारी को अपना मोबाइल नंबर देने का भी निर्देश दिया।
इमाम ने अपने भाई की 25 मार्च को होने वाली शादी में शामिल होने और ईद के दौरान परिवार के साथ समय बिताने के लिए 15 मार्च से 26 अप्रैल तक छह सप्ताह की अंतरिम जमानत मांगी थी। हालांकि अदालत ने उन्हें केवल 10 दिन की अंतरिम जमानत ही मंजूर की।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद शरजील इमाम को 30 मार्च की शाम तक जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा।
गौरतलब है कि शरजील इमाम उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए दंगों से जुड़े मामले में आरोपी हैं। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह हिंसा नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, इमाम ने कथित तौर पर जेएनयू के मुस्लिम छात्रों का एक व्हाट्सएप समूह बनाया और संचालित किया था, जिसका इस्तेमाल विरोध प्रदर्शनों के समन्वय और लामबंदी के लिए किया जाता था। पुलिस का यह भी आरोप है कि उन्होंने जंगपुरा में हुई कथित गुप्त बैठकों में हिस्सा लिया, जहां चक्का जाम और विरोध प्रदर्शनों को तेज करने की रणनीति पर चर्चा की गई थी।
पुलिस ने इमाम पर यह भी आरोप लगाया है कि शाहीन बाग में लंबे समय तक चले विरोध प्रदर्शन की स्थापना और उसे जारी रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
