लेह, 14 मार्च (RNN)। लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने शनिवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत को रद्द करने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के लिए सकारात्मक कदम बताया।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में आंदोलन और हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है तथा लोगों की आकांक्षाओं और चिंताओं से जुड़े सभी मुद्दों को हितधारकों के साथ संवाद के माध्यम से सुलझाया जाएगा।
केंद्र सरकार ने शनिवार को घोषणा की कि उसने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत की गई हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। उन्हें लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद लगभग छह महीने पहले गिरफ्तार किया गया था, जिनमें चार लोगों की मौत हो गई थी।
हिरासत रद्द होने के बाद वांगचुक को जोधपुर जेल से रिहा कर दिया गया।
लोक भवन की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने केंद्र के इस कदम को “सकारात्मक कदम” बताया। उन्होंने कहा कि लद्दाख हमेशा से देशभक्ति, राष्ट्रवाद और शांतिप्रिय स्वभाव के लिए जाना जाता रहा है।
शुक्रवार को लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के चौथे उपराज्यपाल के रूप में शपथ लेने वाले सक्सेना ने कहा कि सभी मुद्दों का समाधान संवाद और आपसी समझ के माध्यम से सौहार्दपूर्ण ढंग से किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “लद्दाख में आंदोलन, बंद या हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। ऐसे कदमों से सार्थक प्रगति नहीं होती। इसके बजाय स्थायी समाधान के लिए सहयोग और शांतिपूर्ण बातचीत का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।”
गौरतलब है कि लेह एपेक्स बॉडी और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।
सक्सेना ने उम्मीद जताई कि लद्दाख की जनता के निरंतर समर्थन और सहयोग से केंद्र शासित प्रदेश में स्थायी शांति कायम होगी और विकास की गति तेज होगी।
राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर केंद्र शासित प्रदेश में हिंसक प्रदर्शन शुरू होने के दो दिन बाद 26 सितंबर 2025 को सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया गया था। प्रदर्शनों में 22 पुलिसकर्मियों सहित 45 से अधिक लोग घायल हुए थे।
लेह के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर “जन व्यवस्था बनाए रखने” के लिए वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया था और बाद में उन्हें जोधपुर जेल भेज दिया गया था।
