पश्चिम एशिया संकट पर संसद में चर्चा की मांग पर टकराव, सरकार के रुख से विपक्ष नाराज

नयी दिल्ली, 9 मार्च । पश्चिम एशिया में जारी संकट को लेकर संसद में विस्तृत चर्चा कराने की विपक्ष की मांग को सरकार द्वारा स्वीकार किए जाने की संभावना कम दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार का मानना है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर पहले ही दोनों सदनों को इस मुद्दे पर जानकारी दे चुके हैं, इसलिए अलग से चर्चा की आवश्यकता नहीं है।

सूत्रों ने बताया कि सरकार लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा कराना चाहती है। इस प्रस्ताव पर अब मंगलवार को चर्चा होने की संभावना है, क्योंकि सोमवार को पश्चिम एशिया के मुद्दे पर विपक्ष के विरोध के कारण सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित करनी पड़ी।

सोमवार को लोकसभा में उस समय हंगामा शुरू हो गया जब विदेश मंत्री जयशंकर “पश्चिम एशिया में स्थिति” पर बयान देने के लिए खड़े हुए। विपक्षी सदस्यों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और इस विषय पर विस्तृत चर्चा की मांग की। पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने विपक्षी सदस्यों से सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहने के कारण कार्यवाही दो बार स्थगित होने के बाद अंततः पूरे दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी।

संसदीय कार्य मंत्री किरन रीजीजू ने विपक्ष, खासकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, पर गैरजिम्मेदार व्यवहार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष पहले लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ “अनावश्यक” प्रस्ताव लेकर आया और अब दूसरा मुद्दा उठाकर सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है। रीजीजू ने कहा कि सरकार प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष को इस पर चर्चा शुरू करनी चाहिए।

दूसरी ओर, कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने उच्च सदन में पश्चिम एशिया के संघर्ष और उसके भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर संक्षिप्त चर्चा कराने की मांग की। हालांकि, विदेश मंत्री जयशंकर ने हंगामे के बीच अपना बयान पूरा किया।

बयान से पहले चर्चा की मांग पूरी न होने पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए। बाद में संसद परिसर में राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी सांसदों के साथ विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शन किया और सरकार पर इस मुद्दे पर “चुप्पी” साधने का आरोप लगाया।

इससे पहले बजट सत्र के दूसरे चरण की रणनीति तय करने के लिए विपक्षी दलों की बैठक खरगे के कक्ष में हुई। खरगे ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि ईरान के साथ अमेरिका-इजराइल का युद्ध अब भारत के पड़ोस तक पहुंच गया है और इस गंभीर भू-राजनीतिक संकट पर संसद में व्यापक चर्चा आवश्यक है। उन्होंने सरकार से ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित रखने के लिए विस्तृत आपातकालीन योजना बनाने की भी मांग की।

Related Post

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *