अभिषेक बनर्जी का आरोप- एसआईआर से पहले ही एक करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का लक्ष्य तय

कोलकाता, 1 मार्च: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के सांसद और महासचिव अभिषेक बनर्जी ने रविवार को आरोप लगाया कि राज्य में एक करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाने का लक्ष्य प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही तय कर लिया गया था। उन्होंने कहा कि हटाए गए और “विचाराधीन” रखे गए नामों की कुल संख्या लगभग 1.2 करोड़ के आसपास पहुंच रही है।

बनर्जी ने संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि भाजपा नेताओं ने पहले ही सार्वजनिक मंचों से बड़े पैमाने पर नाम हटाने की बात कही थी। उनके अनुसार, यही संकेत देता है कि पूरी प्रक्रिया पूर्व-निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप संचालित की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है और वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों का हनन हो रहा है।

तृणमूल नेता ने घोषणा की कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी छह मार्च को मतदाताओं के नाम “मनमाने तरीके से हटाने” के विरोध में धरना देंगी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता सूची की शुद्धता जरूरी है, लेकिन यह प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।

बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर अभियान का उद्देश्य अवैध प्रवासियों की पहचान करना था, तो संबंधित आंकड़े सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार निष्पक्षता के साथ कार्य नहीं कर रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस ने संकेत दिया कि वह इस मुद्दे को लेकर उच्चतम न्यायालय का रुख कर सकती है।

उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेटर ऋचा घोष का नाम “विचाराधीन” सूची में शामिल किए जाने का मुद्दा उठाते हुए निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए और इसे प्रशासनिक विसंगति का उदाहरण बताया।

इस बीच, निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद राज्य में मतदाताओं की संख्या में लगभग 8.3 प्रतिशत यानी 63.66 लाख की कमी आई है। पुनरीक्षण से पहले पश्चिम बंगाल में कुल मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ थी, जो घटकर करीब 7.04 करोड़ रह गई है।

तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया से लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, जबकि विपक्षी दलों ने मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए इसे आवश्यक कदम बताया है। राज्य में आगामी चुनावों से पहले यह मुद्दा प्रमुख राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

Related Post

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *