लखनऊ, 14 जुलाई। उत्तर प्रदेश के ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और राष्ट्रहित में लिया गया ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को शीघ्र लागू किया जाना चाहिए, जिससे लोकतांत्रिक प्रणाली अधिक प्रभावी बनेगी और विकास कार्यों को नई गति मिलेगी। उन्होंने इसके साथ ‘वन वोटर लिस्ट’ की व्यवस्था लागू करने की भी वकालत की।
नई दिल्ली की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सदस्यों के साथ लखनऊ के एक होटल में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह, पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह तथा पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
बैठक को संबोधित करते हुए ए.के. शर्मा ने कहा कि वर्ष 2021 से सक्रिय राजनीति में आने के बाद उन्होंने लोकसभा, विधानसभा, पंचायत और नगर निकाय सहित पांच चुनाव देखे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 और 2029 में भी चुनाव प्रस्तावित हैं। इस तरह केवल आठ वर्षों में आठ चुनाव होने की स्थिति बन जाती है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था और विकास कार्य प्रभावित होते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक चुनाव से दो-तीन महीने पहले पूरा प्रशासन चुनावी तैयारियों में जुट जाता है और चुनाव संपन्न होने के बाद भी सामान्य प्रशासनिक गतिविधियों को पटरी पर आने में समय लगता है। इससे विकास परियोजनाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की गति प्रभावित होती है।
ए.के. शर्मा ने कहा कि यदि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ लागू होता है तो चुनावों की आवृत्ति कम होगी, चुनावी खर्च में उल्लेखनीय कमी आएगी, सुरक्षा बलों की बार-बार तैनाती की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और सरकारी संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग हो सकेगा। उन्होंने कहा कि इससे प्रशासन विकास कार्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेगा और जनता को समयबद्ध एवं बेहतर सेवाएं मिलेंगी।
बैठक में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने भी ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का समर्थन करते हुए कहा कि यह व्यवस्था देशहित में आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के महत्वपूर्ण सुधारों पर सभी राजनीतिक दलों और समाज के विभिन्न वर्गों को सकारात्मक सोच के साथ आगे आना चाहिए। उनके अनुसार, इस व्यवस्था के लागू होने से लोकतंत्र और अधिक सशक्त होगा तथा विकास कार्यों में तेजी आएगी।
बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने भी चुनावी सुधारों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे और लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए व्यापक सहमति और संवाद की आवश्यकता पर बल दिया।
