उज्जैन, 30 जून 2026 (यूएनएस)। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज मंगलवार को उज्जैन पहुंचे, जहां उन्होंने महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के षष्ठ दीक्षांत समारोह में भाग लिया। समारोह में उन्हें ‘महा महोपाध्याय’ की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। इसके बाद उन्होंने श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर बाबा महाकाल के दर्शन-पूजन किए और देश की सुख-समृद्धि की कामना की।
महाकाल मंदिर में दर्शन के बाद स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली और बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में मिली ‘महा महोपाध्याय’ की उपाधि को वह बाबा महाकाल का प्रसाद मानते हैं। उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल का आशीर्वाद सभी देशवासियों पर बना रहे और भारत निरंतर उन्नति करता रहे। मंदिर समिति की ओर से सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने उनका स्वागत किया।
इस दौरान राम मंदिर में कथित दान चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले को लेकर मीडिया ने उनसे सवाल किए, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने केवल मुंह पर उंगली रखकर चुप रहने का संकेत दिया और बिना कुछ बोले अपनी कार में बैठकर रवाना हो गए। उनकी इस चुप्पी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा रही।
गौरतलब है कि अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है। इस मामले में आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच एजेंसियां कथित वित्तीय अनियमितताओं के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।
दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने की। इस अवसर पर 21 विद्यार्थियों को उपाधियां तथा 42 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक प्रदान किए गए। कुल 1303 पात्र विद्यार्थियों में से 179 ने पंजीयन कराया था, जबकि 63 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की उपाधियां प्रदान की गईं। समारोह में श्रीलाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रमेश पांडेय को ‘विद्या वाचस्पति’ तथा स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज को ‘महा महोपाध्याय’ की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
