हरिद्वार जमीन घोटाले में धामी सरकार का एक्शन, IAS चौधरी बर्खास्त, पूर्व DM के खि‍लाफ कार्रवाई की स‍िफारि‍श

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

देहरादून, 19 जून 2026 (यूएनएस)। उत्तराखंड सरकार ने हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में बड़ी कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ सख्त संदेश दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मामले में तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी की सेवा समाप्त करने की संस्तुति की गई है, जबकि तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह के विरुद्ध गंभीर दंडात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।

मुख्यमंत्री धामी ने भ्रष्टाचार के प्रति अपनी शून्य सहनशीलता की नीति को दोहराते हुए कहा कि जनधन के दुरुपयोग और प्रशासनिक अनियमितताओं को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सर्वोच्च प्राथमिकता हैं तथा दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

हरिद्वार भूमि घोटाले में धामी सरकार का बड़ा प्रहार

सरकार की ओर से जारी निर्णय के अनुसार, तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी को भूमि खरीद प्रकरण में गंभीर अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार मानते हुए तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति की गई है। वहीं, तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह को अपने दायित्वों और प्रशासनिक कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) लगाए जाने का निर्णय लिया गया है। दोनों अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को प्रस्ताव भेजा जा रहा है।

इसके अतिरिक्त, तत्कालीन उपजिलाधिकारी अजयवीर सिंह के खिलाफ भी कार्रवाई करते हुए उनकी सेवा अभिलेख में प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करने तथा उनकी तीन वार्षिक वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि हरिद्वार नगर निगम की भूमि खरीद से जुड़ा मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने तत्काल संज्ञान लिया था। प्रारंभिक जांच में वित्तीय अनियमितताओं और प्रक्रियागत खामियों के संकेत मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी सहित कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था। इसके बाद विशेष जांच और वित्तीय ऑडिट के माध्यम से पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई गई।

जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए यह कार्रवाई की है। राज्य सरकार का मानना है कि सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

धामी सरकार की इस कार्रवाई को उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के विरुद्ध अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसे एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि पद का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों को किसी भी स्तर पर संरक्षण नहीं मिलेगा और जनहित से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय की जाएगी।

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