नई दिल्ली/जिनेवा, 18 जून 2026। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत ने पाकिस्तान को आतंकवाद और सिंधु जल संधि के मुद्दे पर कड़ा जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि आतंकवाद को राज्य नीति की तरह अपनाने वाला देश सहयोग और सद्भावना पर आधारित समझौतों का लाभ लेने की उम्मीद नहीं कर सकता। भारत ने वर्ष 1960 की सिंधु जल संधि को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप पुनर्विचार योग्य बताते हुए कहा कि छह दशक पुरानी व्यवस्था को बदलती वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों से अलग नहीं रखा जा सकता।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत की प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि एक ओर पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देता है और दूसरी ओर सद्भावना तथा विश्वास पर आधारित समझौतों के लाभ चाहता है, यह तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और किसी भी तकनीकी या संस्थागत व्यवस्था को समय के अनुरूप ढालना आवश्यक होता है।
भारत ने हाल में हुए पहलगाम आतंकी हमला का भी उल्लेख किया, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। भारत ने दोहराया कि इस हमले के बाद सिंधु जल संधि को तब तक स्थगित रखा गया है, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह समाप्त करने के लिए विश्वसनीय और ठोस कदम नहीं उठाता।
भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान को अपने आंतरिक हालात पर ध्यान देने की सलाह देते हुए कहा कि उसे भारत के मामलों में हस्तक्षेप करने के बजाय अपने देश की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान को ऐसा राष्ट्र बताया जो स्वयं चरमपंथी संगठनों को संरक्षण देता है और बाद में उन्हीं गतिविधियों के दुष्परिणामों पर चिंता जताता है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान का आतंकवाद को लेकर दोहरा रवैया अब दुनिया के सामने उजागर हो चुका है।
भारत ने जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन की टिप्पणियों को भी सिरे से खारिज कर दिया। भारतीय पक्ष ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है तथा इस विषय पर भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट और अटल है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान का दुष्प्रचार उसकी आंतरिक विफलताओं से ध्यान भटकाने का प्रयास है।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष यह भी स्पष्ट किया कि आतंकवाद और संवाद एक साथ नहीं चल सकते। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान की पुरानी रणनीतियां और निराधार आरोप अब वैश्विक मंचों पर प्रभावी नहीं रह गए हैं तथा दुनिया आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की चिंताओं को गंभीरता से समझ रही है।
भारत ने अपने वक्तव्य के अंत में दोहराया कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई और देश की संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर उसका रुख पूरी तरह स्पष्ट है और उसमें किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
