लखनऊ, 11 मई 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश में लगाए गए स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की कार्यप्रणाली और उनकी सटीकता पर लगातार उठ रहे सवालों को गंभीर बताते हुए उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के समक्ष प्रस्ताव दाखिल किया है। परिषद ने मांग की है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की गुणवत्ता और एक्यूरेसी की जांच सीपीआरआई बेंगलुरु से कराई जाए, ताकि उपभोक्ताओं के बीच व्याप्त असंतोष और अविश्वास दूर हो सके।
परिषद के अध्यक्ष एवं केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग की केंद्रीय सलाहकार समिति सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग को सौंपे गए प्रस्ताव में कहा कि प्रदेश में अब तक 85 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। इनमें से अधिकांश मीटर प्रीपेड मोड में संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि स्मार्ट मीटर तेज चल रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं के बिजली बिल में असामान्य बढ़ोतरी हो रही है।
उन्होंने बताया कि कई जिलों में उपभोक्ताओं द्वारा विरोध-प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं। विभाग की ओर से गठित चार सदस्यीय जांच समिति ने विभागीय लैब में जांच कर मीटरों को सही बताया है, लेकिन अब तक अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे उपभोक्ताओं में संदेह और बढ़ गया है।
अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग को यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2020 में भी स्मार्ट मीटरों की सटीकता पर सवाल उठे थे। उस समय विभागीय जांच में मीटरों को सही बताया गया था, लेकिन बाद में तत्कालीन ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के निर्देश पर सीपीआरआई बेंगलुरु से कराई गई जांच में कई तकनीकी कमियां और अनियमितताएं सामने आई थीं।
परिषद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर परियोजना भारत सरकार की स्टैंडर्ड बिडिंग गाइडलाइन के तहत संचालित हो रही है। गाइडलाइन के अनुसार यदि मीटर की सटीकता पर सवाल उठे तो उसकी जांच सीपीआरआई, यूटिलिटी लैब या अधिकृत लैब से कराई जानी चाहिए। ऐसे में किसी अन्य संस्थान, जैसे आईआईटी कानपुर से जांच कराने का प्रयास निर्धारित मानकों के विपरीत होगा।
परिषद का कहना है कि ऊर्जा मंत्री और विद्युत निगमों के वरिष्ठ अधिकारी लगातार सार्वजनिक रूप से स्मार्ट मीटरों को पूरी तरह सही बता रहे हैं, इसलिए विभागीय जांच पर उपभोक्ताओं का भरोसा नहीं बन पा रहा है। ऐसे में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सीपीआरआई, बेंगलुरु से जांच कराना ही सबसे विश्वसनीय विकल्प है।
उपभोक्ता परिषद ने आयोग से जनहित में तत्काल निर्देश जारी कर स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है, ताकि प्रदेश की करोड़ों जनता के बीच फैले असंतोष और अविश्वास को दूर किया जा सके।
