लखनऊ, 01 May 2026 (RNN)। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से महज आठ महीने पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर संगठनात्मक फैसलों और मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पांच महीने पहले प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने वाले पंकज चौधरी अब तक अपनी पूरी टीम तैयार नहीं कर सके हैं, जिससे कार्यकर्ताओं में इंतजार और बेचैनी बढ़ती जा रही है।
प्रदेश में भाजपा संगठन को नई संरचना देने और जमीनी कार्यकर्ताओं के समायोजन का कार्य अभी अधूरा है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी लंबे समय से चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। पार्टी के अंदर कई स्तरों पर बैठकें होने के बावजूद फैसलों में देरी ने कार्यकर्ताओं की उम्मीदों को अधर में डाल दिया है। महिला जनआक्रोश अभियान के समापन के बाद अब संगठनात्मक पुनर्गठन की मांग और तेज हो गई है।
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े की लखनऊ में दो दिवसीय बैठक और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ कई दौर की चर्चाओं के बावजूद मंत्रिमंडल फेरबदल या संगठन में बड़े बदलाव को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। प्रदेश स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक लगातार बैठकों का सिलसिला जारी है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व—नरेन्द्र मोदी और अमित शाह—से भी मुलाकात की है, लेकिन इसके बावजूद स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
हाल ही में नगरीय निकायों में 2800 से अधिक पदों पर कार्यकर्ताओं के समायोजन के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं की उम्मीदें और बढ़ गई थीं। इसके बाद से बोर्ड, निगम और आयोगों में नियुक्तियों को लेकर भी कार्यकर्ता फैसलों का इंतजार कर रहे हैं। मार्च महीने में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों—काशी, गोरखपुर, पश्चिम, कानपुर-बुंदेलखंड और ब्रज—में समन्वय बैठकों का आयोजन किया गया, जिसमें संघ और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। इन बैठकों में संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति पर चर्चा हुई।
फिलहाल, चुनाव नजदीक होने के बावजूद पार्टी के भीतर बड़े फैसलों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और कार्यकर्ता शीर्ष नेतृत्व के संकेत का इंतजार कर रहे हैं।
