केजीएमयू में फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया, छात्राओं से संपर्क के आरोप; पुलिस जांच में जुटी

लखनऊ, 22 अप्रैल 2026 (यूएनएस)। राजधानी स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) परिसर में एक फर्जी डॉक्टर के सक्रिय होने का मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की सतर्कता से मंगलवार को आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आरोपी खुद को डॉक्टर बताकर मेडिकल कैंप आयोजित करता था और छात्रों-छात्राओं के संपर्क में आने की कोशिश करता था।

केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि हाल ही में सामने आए एक अन्य प्रकरण के बाद कुलपति के निर्देश पर एक जांच टीम गठित की गई थी, जो कैंपस में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी। इसी दौरान सूचना मिली कि कुछ लोग छात्राओं को बहला-फुसलाकर बाहर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। जांच के दौरान हसम अहमद नामक व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध पाई गई।

प्रवक्ता के अनुसार 20 अप्रैल को कैंपस में लगाए गए एक मेडिकल कैंप में करीब 20 छात्र मौजूद थे। टीम को गतिविधियां संदिग्ध लगीं, जिसके बाद जाल बिछाया गया और मंगलवार को सर्जरी विभाग के पास से आरोपी को पकड़ लिया गया। पूछताछ के बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया।

जांच में सामने आया कि आरोपी हमेशा डॉक्टर की वेशभूषा में रहता था और केजीएमयू के विभिन्न विभागों में आने-जाने का दावा करता था। उसके संपर्क में 20 से अधिक छात्र-छात्राएं होने की बात सामने आई है, हालांकि स्टाफ से उसके किसी संबंध की पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

आरोपी द्वारा इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की जांच में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। बताया गया कि उसने केजीएमयू के नाम से फर्जी लेटरहेड तैयार कर रखे थे और छात्राओं को दिए गए पत्रों में नकली हस्ताक्षर पाए गए हैं।

पुलिस पूछताछ में हसम अहमद ने बताया कि वह 12वीं पास है और सिद्धार्थनगर का निवासी है। उसने शिया इंटर कॉलेज से पढ़ाई करने की बात कही। आरोपी ने दावा किया कि उसने समाजसेवा के नाम पर एक संस्था बनाई थी और उसी के जरिए मेडिकल कैंप आयोजित करता था।

उसने यह भी कहा कि उसके साथ चार अन्य डॉक्टर जुड़े हैं और वह जल्द ही एक अस्पताल खोलने की योजना बना रहा था। उसने अपनी संस्था से जुड़े कुछ लोगों के नाम भी बताए हैं, जिनमें एरा मेडिकल कॉलेज और इंटीग्रल यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ व्यक्तियों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। संस्था का मुख्य संचालक फैक अहमद मंसूरी बताया गया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस अब आरोपी के नेटवर्क, उसके संपर्कों और गतिविधियों की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी।

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