नयी दिल्ली, 6 अप्रैल (UNS)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि 16 अन्य मालवाहक जहाज अब भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने संवाददाताओं को बताया कि 46,650 टन एलपीजी से लदा टैंकर ‘ग्रीन सानवी’ सात अप्रैल को भारत पहुंचेगा, जबकि 15,500 टन गैस लेकर ‘ग्रीन आशा’ टैंकर नौ अप्रैल को भारतीय तट पर पहुंचेगा।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारतीय समुद्री परिचालन सुरक्षित और निर्बाध बना हुआ है। दो एलपीजी टैंकर इस रणनीतिक मार्ग को पार कर चुके हैं, जबकि 433 नाविकों के साथ भारतीय ध्वज वाले 16 जहाज अभी भी उसी क्षेत्र में मौजूद हैं।
अधिकारियों के अनुसार, अब तक भारतीय ध्वज वाले कुल आठ एलपीजी टैंकर इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को सुरक्षित पार कर चुके हैं। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले शुरू होने के बाद से यह मार्ग अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है। यह जलडमरूमध्य खाड़ी देशों से तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति का प्रमुख रास्ता माना जाता है।
फिलहाल फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों में एक एलएनजी पोत, दो एलपीजी टैंकर, छह कच्चा तेल ले जाने वाले जहाज, तीन कंटेनर पोत, एक ड्रेजर, एक रसायन ले जाने वाला पोत और दो थोक मालवाहक जहाज शामिल हैं।
वरिष्ठ अधिकारी ने ईरान द्वारा इस जलडमरूमध्य को पार करने के लिए शुल्क लिए जाने की खबरों पर कहा कि सरकार को इस तरह के किसी भुगतान की कोई जानकारी नहीं है।
भारत अपनी रसोई गैस (एलपीजी) की जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात से पूरा करता है, जिसमें से करीब 90 प्रतिशत आपूर्ति पश्चिम एशिया से होती है। ऐसे में इन टैंकरों का सुरक्षित आगमन देश में एलपीजी आपूर्ति पर पड़ रहे दबाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह भी ‘बीडब्ल्यू टीवाईआर’ और ‘बीडब्ल्यू ईएलएम’ नामक दो टैंकर करीब 94,000 टन गैस के साथ सुरक्षित रूप से भारत पहुंच चुके थे।
