मोदी और हिमंत ने आदिवासियों के विकास के लिए रोडमैप तैयार किया : अमित शाह

दुधनोई, 3अप्रैल (UNS)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने आदिवासियों के समग्र विकास के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया है। उन्होंने इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए राज्य में भारतीय जनता पार्टी की लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी सुनिश्चित करने की अपील की।

ग्वालपाड़ा जिला के दुधनोई में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि कांग्रेस ने कभी किसी आदिवासी महिला को राष्ट्रपति नहीं बनाया, लेकिन मोदी सरकार ने इस परंपरा को बदलते हुए द्रौपदी मुर्मू को देश का राष्ट्रपति बनाया। उन्होंने कहा कि यदि राज्य की जनता भाजपा को फिर से जनादेश देती है, तो आदिवासी विकास का यह रोडमैप और तेज गति से लागू किया जाएगा।

कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप

शाह ने कामरूप जिला के पलाशबाड़ी में एक अन्य रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की असम इकाई के एक शीर्ष नेता के भारत के दुश्मन देश से संबंध होने के आरोप लगे हैं, लेकिन वह इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। यह टिप्पणी कांग्रेस नेता गौरव गोगोई और उनकी पत्नी के पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से कथित संबंधों के आरोपों की पृष्ठभूमि में की गई।

गृह मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पलाशबाड़ी में भारतीय प्रबंधन संस्थान की स्थापना के लिए लाए गए विधेयक को रोकने की कोशिश की थी, जबकि भाजपा सरकार ने राज्य में आईआईएम की स्थापना सुनिश्चित की।

आदिवासी क्षेत्रों को यूसीसी से बाहर रखने का आश्वासन

शाह ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों को समान नागरिक संहिता के दायरे में नहीं लाया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस आदिवासियों को डराने के लिए अफवाहें फैला रही है कि वे यूसीसी से प्रभावित होंगे, जबकि ऐसा नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि आजादी के बाद कांग्रेस सरकारों ने आदिवासियों के विकास पर लगभग 25,000 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि मोदी सरकार ने पिछले 11 वर्षों में 1.38 लाख करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं।

घुसपैठ और सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया

असम से सटे गारो पहाड़ियां में हाल ही में हुई हिंसा का उल्लेख करते हुए शाह ने आरोप लगाया कि घुसपैठियों ने आदिवासी महिलाओं से शादी कर स्थानीय परिषदों में सत्ता हासिल करने की कोशिश की, जिससे संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हुई। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और यदि जनता पांच साल और मौका देती है, तो राज्य को उनसे मुक्त किया जाएगा।

चुनाव कार्यक्रम घोषित

गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 2019 के बाद विभिन्न समझौतों के जरिए असम में शांति बहाल की गई है और 10,000 से अधिक युवाओं को आत्मसमर्पण कराकर मुख्यधारा में शामिल किया गया है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे कांग्रेस के चुनाव चिह्न ‘पंजा’ पर वोट बर्बाद न करें और भाजपा के ‘कमल’ के पक्ष में मतदान करें।

असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान नौ अप्रैल को होगा, जबकि मतों की गिनती चार मई को की जाएगी।

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