नई दिल्ली, 1 अप्रैल 2026, UNS। दिल्ली हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के साझा की गई जानकारी को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने अभिनेत्री ऋचा चड्ढा समेत कई लोगों को फटकार लगाते हुए कहा कि तथ्यों की जांच किए बिना किसी को दोषी ठहराना न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
यह मामला 11 मार्च की एक फ्लाइट से जुड़ा है, जिसमें एक महिला पत्रकार ने एक यात्री पर कथित छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। हालांकि, आरोपित व्यक्ति ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया कि वह पूरी यात्रा के दौरान अपनी सीट पर ही था और फ्लाइट खत्म होने से पहले सो रहा था।
मामले ने तूल तब पकड़ा जब सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए आरोपी की पहचान, फोटो और पेशेवर जानकारी सार्वजनिक कर दी गई। इस पोस्ट को कई लोगों और मशहूर हस्तियों ने शेयर किया, जिससे मामला तेजी से वायरल हो गया। ऋचा चड्ढा द्वारा इस पोस्ट को री-शेयर करने के बाद विवाद और गहरा गया।
सुनवाई के दौरान जस्टिस विकास महाजन ने कहा कि सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री एफआईआर की सीमाओं से आगे बढ़ गई और बिना किसी ठोस जांच के ही व्यक्ति को ‘मॉलेस्टर’ तक घोषित कर दिया गया। उन्होंने इस तरह की पोस्ट्स को गैर-जिम्मेदाराना और न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला बताया।
अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित पोस्ट्स में व्यक्ति की तस्वीर के साथ अपमानजनक शब्द बड़े अक्षरों में लिखे गए, जिससे उसकी प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा। कोर्ट ने इसे प्रथम दृष्टया मानहानि का मामला मानते हुए कहा कि इस प्रकार की हरकतें किसी व्यक्ति के निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन करती हैं।
अपने अंतरिम आदेश में अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना सबूत और जांच के किसी को दोषी ठहराना न केवल अनुचित है, बल्कि कानून की बुनियादी भावना के भी विपरीत है। साथ ही, कोर्ट ने सोशल मीडिया यूजर्स और सार्वजनिक हस्तियों को जिम्मेदारी से व्यवहार करने की नसीहत दी है।
