लखनऊ, 29 मार्च 2026 (यूएनएस)। राजधानी लखनऊ में ट्रांसजेंडर पर्सन्स अमेंडमेंट बिल-2026 के विरोध में एलजीबीटीक्यूआईए+ समुदाय के करीब 500 लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने ‘काला बिल वापस लो’ और ‘मेरी बॉडी, मेरी मर्जी’ जैसे नारे लगाए और बेगम हजरत महल पार्क से विधानसभा की ओर कूच करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें वहीं रोक दिया।
प्रदर्शनकारियों ने इस संशोधन बिल को अपने अधिकारों और पहचान के खिलाफ बताया। उनका कहना था कि प्रस्तावित बदलावों के तहत किसी व्यक्ति की जेंडर पहचान का निर्धारण मेडिकल जांच के आधार पर किया जाना अपमानजनक और अस्वीकार्य है। उनका तर्क था कि जेंडर पहचान व्यक्ति की भावना और आत्मबोध से तय होती है, न कि केवल शारीरिक आधार पर।
प्रदर्शन में शामिल शुभम अग्रहरि उर्फ सुरभि ने कहा कि नए प्रावधानों के अनुसार ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अपनी पहचान साबित करने के लिए अपमानजनक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि यह उनकी गरिमा और निजता का उल्लंघन है।
वहीं, ट्रांस वूमेन जिया ने इस बिल को समुदाय के खिलाफ साजिश करार देते हुए कहा कि मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर किसी की भावनाओं और पहचान का निर्धारण करना गलत है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या लोगों को सार्वजनिक रूप से अपमानित कर उनकी पहचान तय की जाएगी।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि वे इस मुद्दे को लेकर आगे न्यायालय का रुख करेंगे और 6 अप्रैल को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन आयोजित करेंगे।
प्रदर्शन में सामाजिक संगठन “भरोसा ट्रस्ट” से जुड़ीं कार्यकर्ता जतिन ने आरोप लगाया कि बिल में संशोधन से पहले समुदाय के प्रतिनिधियों से कोई सार्थक संवाद नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यदि व्यापक स्तर पर चर्चा और सुझाव लिए जाते, तो इस तरह का विवाद खड़ा नहीं होता।
प्रदर्शन में शामिल अन्य प्रतिभागियों ने भी सरकार से मांग की कि बिल में संशोधन से पहले समुदाय की राय को प्राथमिकता दी जाए और उनकी गरिमा, अधिकारों व पहचान का सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
