स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अग्रिम जमानत देने के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती

नयी दिल्ली, 27 मार्च (RNN)। पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम से जुड़े मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को अग्रिम जमानत देने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की गई है।

मामले के शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा दायर इस अपील में 25 मार्च को दिए गए उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए कहा गया है कि अदालत ने स्वामी पर लगे आरोपों की गंभीरता पर पर्याप्त विचार नहीं किया। याचिका में यह भी आशंका जताई गई है कि आरोपित गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे जांच प्रभावित होने की संभावना है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इससे पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी को अग्रिम जमानत प्रदान करते हुए यह स्पष्ट किया था कि मामले की जांच बिना किसी बाहरी प्रभाव के निष्पक्ष रूप से जारी रहनी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि 27 फरवरी को अदालत ने स्वामी की गिरफ्तारी पर अस्थायी रोक लगाते हुए निर्देश दिया था कि नाबालिग बच्चों के कथित यौन उत्पीड़न और अन्य अपराधों से जुड़े इस मामले में अंतिम आदेश सुनाए जाने तक उन्हें हिरासत में नहीं लिया जाएगा। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और याचिकाकर्ताओं को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था।

यह मामला प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज एक प्राथमिकी से संबंधित है, जिसमें यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने कई ‘बटुकों’ (युवा शिष्यों) का कथित रूप से यौन शोषण किया।

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