लखनऊ, 26 मार्च (RNN)। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र और उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकारों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि महंगाई और बेरोजगारी जैसी मुख्य समस्याओं को हल करने में नाकाम रहीं ये सरकारें केवल ‘प्रोपेगैंडा’ और ‘इवेंट आधारित राजनीति’ पर निर्भर हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री यादव ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि भाजपा के शासन में आम लोगों को रसोई गैस जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि गैस की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति से जुड़ी दिक्कतों को देखते हुए उनके परिवार ने घर पर पहले से ही मिट्टी के दो पारंपरिक चूल्हों का इंतजाम कर लिया है।
उन्होंने कहा, “मैंने पहले भी लोगों को सलाह दी थी कि किसी संभावित संकट को देखते हुए गोबर के उपले, जलावन (लकड़ियां) और कोयले के चूल्हे तैयार रखें, क्योंकि आने वाले समय में गैस को लेकर हर किसी को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।”
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि गैस सिलेंडर की आपूर्ति में किए गए बदलावों के अनुसार उत्पादन की सही योजना नहीं बनाई गई, जिसके कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में लोगों को खाना पकाने के लिए लकड़ी और कोयले जैसे पारंपरिक तरीकों पर ज्यादा निर्भर होना पड़ सकता है।
छोटे उद्यमियों और व्यापारियों पर पड़ रहे असर का जिक्र करते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि रोज कमाने-खाने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के गलत फैसलों की वजह से नागरिकों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
राज्य सरकार द्वारा हाल में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर सवाल उठाते हुए यादव ने इसकी पूरी जांच की मांग की। उनका आरोप है कि कई समझौते ऐसी कंपनियों के साथ किए गए हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है और इनका उद्देश्य केवल निवेश का एक झूठा माहौल तैयार करना है।
प्रौद्योगिकी के क्षेत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में खेती में कृत्रिम मेधा (एआई) के उपयोग की अपार संभावनाएं हैं, खासकर मौसम और पैदावार का अनुमान लगाने में, लेकिन सरकार इसके लिए जरूरी माहौल और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में असफल रही है।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के संदर्भ में भारत की वैश्विक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि केंद्र की गलत आर्थिक और कूटनीतिक नीतियों के कारण देश ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर गंवा दिया है।
इसके अलावा, जंगली इलाकों में मानव और वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को लेकर उन्होंने राज्य सरकार पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि जंगलों की कटाई और अवैध खनन के कारण जानवर जंगलों से बाहर आने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे गांवों में किसानों और ग्रामीणों पर हमलों की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि सीतापुर जैसे जिलों में जंगली जानवरों के हमलों में कई लोगों की जान जा चुकी है, जबकि संबंधित विभाग प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहा है।
