महाराष्ट्र विधान परिषद में धर्मांतरण रोकने वाला विधेयक पारित

मुंबई, 17 मार्च।  महाराष्ट्र में जबरन और धोखाधड़ी से होने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाया गया “महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026” विधान परिषद में पारित हो गया है। इसके साथ ही यह विधेयक कानून बनने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ गया है। अब इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

इससे एक दिन पहले महाराष्ट्र विधानसभा ने भी इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया था। गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर ने विधान परिषद में विधेयक पेश किया।

विधेयक में जबरदस्ती, प्रलोभन, धोखाधड़ी या विवाह के माध्यम से कराए जाने वाले धर्मांतरण पर कड़े प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत विवाह के नाम पर गैरकानूनी धर्मांतरण कराने वालों को सात साल तक की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

प्रस्तावित कानून के अनुसार, धर्मांतरण की प्रक्रिया को विनियमित किया जाएगा। इसमें धर्म परिवर्तन से पहले संबंधित व्यक्ति को सक्षम प्राधिकारी को सूचना देना अनिवार्य होगा। साथ ही धर्मांतरण कराने वाले और कराने वाले संस्थान को बाद में भी घोषणा करनी होगी।

विधान परिषद में इस विधेयक को लेकर राजनीतिक मतभेद भी देखने को मिले। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने विधेयक का समर्थन किया, जबकि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इसका विरोध किया।

विधेयक के उद्देश्यों में कहा गया है कि हाल के वर्षों में जबरन और संगठित धर्मांतरण के मामलों में वृद्धि देखी गई है, जिन्हें रोकने के लिए कानूनी प्रावधान आवश्यक हैं। सरकार का तर्क है कि कई अन्य राज्यों में भी इस तरह के कानून पहले से लागू हैं।

वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के सदस्य शशिकांत शिंदे ने कहा कि यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि यह कानून किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं है।

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