ईरानी युद्धपोत डुबाये जाने पर अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार के रुख पर उठाए सवाल

लखनऊ, 5 मार्च (RNN)। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास एक ईरानी युद्धपोत डुबोए जाने की घटना को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के रुख पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस गंभीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर केंद्र सरकार की चुप्पी चिंताजनक है और सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।

अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिकी-इजराइली हमलों का भारत की सरहदों के करीब हिंद महासागर तक पहुंचना देशवासियों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा, “यह बेहद चिंतनीय है कि इतने गंभीर विषय पर भाजपा सरकार ने अभूतपूर्व चुप्पी साध रखी है। स्पष्ट किया जाए कि इसे ‘चुप्पी’ माना जाए या किसी विशेष भय के कारण इसे ‘घिग्घी बंधना’ समझा जाए।”

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है, इसलिए देश की सरकार, विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय का दायित्व बनता है कि वे इस पर अपना रुख स्पष्ट करें। उन्होंने आरोप लगाया कि कई दिनों की प्रतीक्षा के बाद भी सरकार द्वारा कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई, जिसके कारण विपक्ष को इस विषय पर बोलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

अखिलेश यादव ने कहा कि मौजूदा संकट की स्थिति में सरकार को आगे आकर देश की जल, थल और वायु सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब सरकार कुछ कह ही नहीं रही है तो देशवासी यह सोचकर परेशान हैं कि वह करेगी क्या। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अपनी नाकामियों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए अस्पष्ट नीति अपना रही है, जिससे लोग अटकलों में ही उलझे रहें।

सपा प्रमुख ने यह भी कहा कि आगामी संसद सत्र में भाजपा के सदस्य ऐसा कोई विवादास्पद विषय जरूर उठाएंगे, जिससे सरकार की विफलताओं पर चर्चा ही न हो सके। उन्होंने कहा कि देश के लिए यह समय ‘सरकार-शून्यता’ का काल प्रतीत हो रहा है।

उल्लेखनीय है कि श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी के हमले में ‘आईरिस देना’ नामक एक ईरानी नौसैन्य जहाज डूब गया। इस संबंध में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने वाशिंगटन में संवाददाताओं से कहा कि एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के एक युद्धपोत को निशाना बनाया।

बताया गया है कि यह ईरानी जहाज हाल ही में आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय नौसैन्य अभ्यास में भी शामिल हुआ था। इस घटना के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री गतिविधियों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

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