नई दिल्ली, 1 मार्च: कथित आबकारी नीति मामले में अदालत से राहत मिलने के 48 घंटे बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला करते हुए दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी के सत्ता से बाहर होने की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है।
राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर उन्हें झूठे मामले में फंसाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले ने उनकी ईमानदारी को प्रमाणित किया है और यह राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति की हार है।
केजरीवाल ने कहा कि जब सरकार आलोचना से डरने लगती है तो यह उसके पतन का संकेत होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति खराब हो रही है और जनता को वास्तविक विकास के बजाय केवल राजनीतिक प्रचार देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि देश को “रहने योग्य भारत” बनाने की जरूरत है, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को प्राथमिकता दी जाए।
रैली में विभिन्न राज्यों से आए कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि उनकी पार्टी जनहित के मुद्दों पर संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और महंगाई को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की और कहा कि जनता अब बदलाव चाहती है।
आप नेता ने अपने प्रशासनिक अनुभव और सार्वजनिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने निजी लाभ के बजाय देश सेवा का मार्ग चुना। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी पारदर्शिता और जवाबदेही की राजनीति को आगे बढ़ा रही है।
सभा में भगवंत मान, मनीष सिसोदिया, आतिशी, संजय सिंह और सौरभ भारद्वाज समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने भी संबोधन दिया और केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की।
केजरीवाल ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है और राजनीतिक दलों को जनता के विश्वास पर खरा उतरना चाहिए। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहें।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अदालत के फैसले के बाद केजरीवाल का यह आक्रामक रुख आगामी चुनावी परिदृश्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण को और तेज कर सकता है। वहीं भाजपा ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि कानून अपना काम करता है और राजनीतिक बयानबाजी से तथ्य नहीं बदलते।
