एसआईआर में ममता बनर्जी की भवानीपुर सीट से 47,000 से अधिक नाम हटाए गए

कोलकाता में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद प्रकाशित मतदाता सूची ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में 47,000 से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जबकि 14,000 से अधिक नामों को “विचाराधीन” श्रेणी में रखा गया है।

एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के समय भवानीपुर में कुल 2,06,295 मतदाता दर्ज थे। पिछले वर्ष दिसंबर में जारी मसौदा सूची में 44,786 नाम हटाने की जानकारी दी गई थी। शनिवार को प्रकाशित अंतिम सूची में 2,324 और नाम हटाए जाने के बाद कुल संख्या 47,094 हो गई। यह आंकड़ा 2021 के उपचुनाव में ममता बनर्जी की जीत के अंतर से लगभग 11,000 कम है।

हटाए गए नामों के अलावा 14,154 मतदाताओं के दस्तावेजों का सत्यापन लंबित है। यदि ये नाम भी सूची से बाहर होते हैं तो क्षेत्र के मतदाताओं की कुल संख्या में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। विधानसभा चुनाव 2026 से पहले इस घटनाक्रम ने राजनीतिक अटकलों को तेज कर दिया है।

भवानीपुर सीट को लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। वर्ष 2021 में तृणमूल नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने यहां जीत दर्ज की थी और बाद में उपचुनाव में ममता बनर्जी ने 58,000 से अधिक मतों के अंतर से विजय हासिल की थी।

इस बीच विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी और भाजपा नेता सुकांत मजूमदार ने मतदाता सूची में हुए बदलाव को महत्वपूर्ण बताया है। भाजपा का दावा है कि हटाए गए नाम दोहराव या मृत मतदाताओं से जुड़े थे और चुनाव में पार्टी मजबूत प्रदर्शन करेगी।

वहीं तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिन मतदाताओं के नाम हटे हैं, उन्हें पुनः आवेदन का अवसर दिया गया है और अंतिम निर्णय अभी शेष है। पार्टी नेताओं ने इसे राजनीतिक बयानबाजी बताते हुए दावा किया कि इससे चुनावी परिणामों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

राज्य में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची संशोधन का मुद्दा प्रमुख राजनीतिक विषय बन गया है और भवानीपुर सीट एक बार फिर राजनीतिक मुकाबले का केंद्र बनती दिखाई दे रही है।

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