वाराणसी/प्रयागराज, 27 फरवरी। यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दर्ज मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा है कि यदि सच्चाई सामने लाने के लिए नार्को टेस्ट आवश्यक हो तो वह इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने शुक्रवार को वाराणसी में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि सत्य उजागर करने के लिए उपलब्ध सभी वैधानिक और वैज्ञानिक उपाय अपनाए जाने चाहिए।
स्वामी ने कहा कि यदि जांच एजेंसियां और न्यायालय उचित समझें तो वह किसी भी वैज्ञानिक परीक्षण में सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि झूठ अधिक समय तक टिक नहीं सकता और समय के साथ तथ्य स्पष्ट हो जाएंगे।
इस बीच स्वामी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय में हुई। अदालत ने मामले में अंतिम निर्णय सुरक्षित रखते हुए राज्य सरकार और वादी पक्ष से जवाब मांगा है। न्यायालय ने निर्देश दिया है कि निर्णय आने तक गिरफ्तारी नहीं की जाएगी और याचिकाकर्ता जांच में सहयोग करेंगे।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि जिन बच्चों का उल्लेख किया जा रहा है, वे उनके आश्रम में कभी रहे ही नहीं। उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट से जुड़े दावों पर भी प्रश्न उठाते हुए कहा कि किसी घटना के लिए जिम्मेदारी तय करने के लिए ठोस साक्ष्य आवश्यक हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता से जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और पूरे प्रकरण को एक सुनियोजित षड्यंत्र बताया। स्वामी ने कहा कि उनका या उनके गुरुकुल का कथित पीड़ितों से कोई संबंध नहीं है और वह न्यायिक प्रक्रिया पर पूर्ण विश्वास रखते हैं।
स्वामी के शिष्य संजय पांडे के अनुसार वह नियमित धार्मिक गतिविधियों में संलग्न हैं और न्यायालय में अपने पक्ष के समर्थन में सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएंगे।
उधर मामले के वादी पक्ष का कहना है कि न्यायालय में साक्ष्य और हलफनामे प्रस्तुत किए जाएंगे और उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है।
उल्लेखनीय है कि प्रयागराज की विशेष पॉक्सो अदालत के निर्देश पर झूंसी थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोपों को लेकर क्षेत्र में व्यापक चर्चा बनी हुई है और दोनों पक्ष न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार नार्को टेस्ट जैसी वैज्ञानिक जांच केवल न्यायालय की अनुमति और संबंधित व्यक्ति की सहमति से ही कराई जा सकती है। फिलहाल मामले में न्यायालय के अंतिम निर्णय पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
