इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गिरफ्तारी पर लगाई अंतरिम रोक

प्रयागराज/वाराणसी, 27 फरवरी। कथित बटुक यौन शोषण मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अग्रिम जमानत याचिका पर अंतिम निर्णय आने तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। यह आदेश न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान पारित किया। अदालत ने राज्य सरकार और मामले के वादी आशुतोष पांडेय को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश भी दिया है।

न्यायालय ने अग्रिम जमानत याचिका पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है, जिसे मार्च के तीसरे सप्ताह में सुनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता जांच प्रक्रिया में पुलिस का पूरा सहयोग करेंगे।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप गुप्ता ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता का आपराधिक पृष्ठभूमि से संबंध रहा है और स्वामी को राजनीतिक कारणों से झूठे मामले में फंसाया गया है। उन्होंने दावा किया कि कथित पीड़ित बटुक कभी स्वामी के आश्रम में रहे ही नहीं। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि आरोप निराधार हैं और गिरफ्तारी से स्वामी की प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।

दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत पक्ष ने अग्रिम जमानत याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाया। सरकार ने कहा कि याचिका पहले सत्र न्यायालय में दायर की जानी चाहिए थी, न कि सीधे उच्च न्यायालय में। अभियोजन पक्ष ने अदालत से याचिका खारिज करने की मांग करते हुए मामले की गंभीरता पर बल दिया।

न्यायालय के आदेश के बाद वाराणसी स्थित श्री विद्या मठ में स्वामी के अनुयायियों और समर्थकों ने खुशी व्यक्त की। समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर अदालत के आदेश का स्वागत किया।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह मुकदमा पूरी तरह निराधार है और उन्हें न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास है। उन्होंने कहा कि कथित पीड़ित उनके आश्रम में कभी नहीं रहे और सत्य अंततः सामने आएगा।

वहीं मामले के वादी आशुतोष पांडेय ने कहा कि गिरफ्तारी पर रोक अंतिम फैसला नहीं है और वे अदालत में साक्ष्य एवं हलफनामा प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि पीड़ितों को न्याय अवश्य मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि यह मामला प्रयागराज की विशेष पॉक्सो अदालत के निर्देश पर दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है, जिसमें स्वामी पर बटुकों के कथित यौन शोषण के आरोप लगाए गए हैं। मामले की जांच जारी है और अब सभी पक्षों की नजरें उच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।

इस घटनाक्रम ने धार्मिक, सामाजिक और कानूनी हलकों में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है, जबकि न्यायालय के अंतिम फैसले का इंतजार किया जा रहा है, जो मामले की दिशा तय करेगा।

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