वन ट्रिलियन इकोनॉमी लक्ष्य पर नगर विकास और ऊर्जा विभाग की समीक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा के सही मूल्यांकन पर जोर

लखनऊ, 25 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को गति देने के लिए नगर विकास एवं ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने की। संगम सभागार में आयोजित इस बैठक में दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लेते हुए लक्ष्य प्राप्ति की रणनीतियों, समयबद्ध कार्ययोजना और परिणामोन्मुखी कार्य प्रणाली पर विस्तार से चर्चा की।

नगर विकास विभाग की समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव पी. गुरु प्रसाद, सचिव/निदेशक अनुज झा और विशेष सचिव प्रवीण लक्षकार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं ऊर्जा विभाग की बैठक में अपर मुख्य सचिव नरेंद्र भूषण, यूपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक पंकज कुमार तथा विभागीय अधिकारी शामिल हुए।

बैठक के दौरान प्रस्तुतिकरण के माध्यम से बताया गया कि प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने में शहरी आधारभूत संरचना और ऊर्जा क्षेत्र की निर्णायक भूमिका है। अधिकारियों ने आधुनिक शहरी सुविधाओं के विस्तार, स्मार्ट शहरी सेवाओं, निवेश आकर्षण, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने तथा निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने से संबंधित योजनाओं का विवरण प्रस्तुत किया।

अपने संबोधन में मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि नगर विकास और ऊर्जा विभाग प्रदेश की आर्थिक प्रगति के दो मजबूत स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि मजबूत शहरी ढांचा और भरोसेमंद विद्युत आपूर्ति उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र के विकास की आधारशिला है। यदि शहरी सेवाएं पारदर्शी और कुशल हों तथा ऊर्जा आपूर्ति विश्वसनीय हो, तो निवेश और रोजगार दोनों में वृद्धि होगी, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लक्ष्य आधारित कार्ययोजना बनाकर उसे तय समयसीमा के भीतर धरातल पर उतारा जाए। उन्होंने विभागीय समन्वय को और सुदृढ़ बनाने, प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा सुशासन की भावना के साथ कार्य करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन से सुनिश्चित होगी।

बैठक में नवीकरणीय ऊर्जा के महत्व पर भी विशेष चर्चा हुई। ऊर्जा मंत्री ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना और प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत उत्पादित बिजली के मूल्यांकन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इन योजनाओं से उत्पन्न ऊर्जा को विभागीय समेकित आंकड़ों में शामिल किया जाना आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिया कि इस संबंध में केंद्र सरकार को पत्र भेजकर उचित मूल्यांकन और लेखांकन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

मंत्री ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा प्रदेश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है। यदि इस क्षेत्र की उपलब्धियों का सही आकलन नहीं किया जाएगा, तो राज्य की वास्तविक प्रगति परिलक्षित नहीं हो पाएगी। इसलिए प्रत्येक यूनिट बिजली के उत्पादन और उसके आर्थिक योगदान का सही दस्तावेजीकरण आवश्यक है।

अपर मुख्य सचिव नरेंद्र भूषण ने कहा कि सौर ऊर्जा आधारित योजनाएं प्रदेश की ऊर्जा क्षमता को मजबूत कर रही हैं, लेकिन उनके उत्पादन का समुचित मूल्यांकन विभागीय आंकड़ों में शामिल न होने से उपलब्धियों का वास्तविक चित्र सामने नहीं आ पाता। उन्होंने अन्य राज्यों के अनुभवों का अध्ययन कर केंद्र सरकार के साथ विस्तृत विमर्श की आवश्यकता पर बल दिया।

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि ऊर्जा और नगर विकास क्षेत्र में सुधारों से न केवल औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि शहरी जीवन स्तर में भी व्यापक सुधार होगा। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि विभाग निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध और परिणामोन्मुखी तरीके से पूरा करने के लिए समन्वित प्रयास करेंगे।

सरकार को उम्मीद है कि इन पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति को नई गति मिलेगी और 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल होंगी।

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