नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि किसी एक व्यक्ति की शिकायत के आधार पर चुनाव प्रक्रिया को आसानी से रोका या बाधित नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने कहा कि चुनाव से जुड़े विवादों का अंतिम और प्रभावी उपाय केवल चुनाव याचिका के माध्यम से ही संभव है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह टिप्पणी उत्तराखंड उच्च न्यायालय के जुलाई 2025 के एक अंतरिम आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई के दौरान की। पीठ ने उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश को रद्द करते हुए कहा कि चुनाव में भाग लेने या उस पर सवाल उठाने का अधिकार वैधानिक प्रकृति का है और इसका प्रयोग संबंधित कानूनों के अनुरूप ही किया जाना चाहिए।
शीर्ष अदालत ने कहा, “इसलिए उच्च न्यायालयों को व्यक्तियों के पक्ष में उदार अंतरिम राहत देने से बचना चाहिए और इसके बजाय राज्य भर में चुनाव के सुचारू और निर्बाध संचालन से जुड़े व्यापक जनहित को ध्यान में रखना चाहिए।”
मामले की पृष्ठभूमि में, उत्तराखंड राज्य चुनाव आयोग ने 12 जिलों में पंचायत चुनाव दोबारा शुरू करने के लिए एक संशोधित अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद एक व्यक्ति ने पिथौरागढ़ जिले के एक निर्वाचन क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया था। हालांकि, आवश्यक खुलासे न करने के आरोप में उसकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई।
उम्मीदवारी रद्द किए जाने से असंतुष्ट होकर संबंधित व्यक्ति ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश ने उसे राहत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने एकल पीठ के आदेश को उच्च न्यायालय की खंडपीठ में चुनौती दी।
खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के आदेश पर स्थगन लगाते हुए निर्वाचन अधिकारी को उस व्यक्ति को चुनाव चिह्न आवंटित करने और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में भाग लेने की अनुमति देने का निर्देश दिया था।
हालांकि, इस अंतरिम आदेश को चुनौती देते हुए दायर अपील पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने खंडपीठ के आदेश को रद्द कर दिया। शीर्ष अदालत ने दो टूक कहा, “किसी व्यक्ति विशेष की शिकायत के आधार पर चुनाव प्रक्रिया को आसानी से रोका या बाधित नहीं किया जा सकता है।”
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि व्यक्तिगत शिकायतों से जुड़े मामलों में चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव याचिका ही एकमात्र वैधानिक उपाय है और न्यायिक हस्तक्षेप से चुनावी प्रक्रिया में अनावश्यक बाधा नहीं आनी चाहिए।
