बजट में प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने से कृषि क्षेत्र खुश, खाद्य तेल क्षेत्र निराश

नयी दिल्ली, एक फरवरी –  कृषि एवं उसके सहायक क्षेत्र ने रविवार को केन्द्रीय बजट 2026-27 का बड़े पैमाने पर स्वागत किया जिसमें 20,000 पशुचिकित्सा पेशेवरों को जोड़ने, शुल्क में कटौती के जÞरिये अपतटीय मछली पकड़ने को बढ़ावा देने तथा काजू एवं अखरोट जैसी महंगी फसलों को समर्थन करने की सरकार की योजनाओं की तारीफ की गई। हालांकि, खाद्य तेल क्षेत्र ने आयात पर निर्भरता कम करने के उपायों की कमी पर निराशा जताई।
उद्योग के लोगों ने कहा कि बजट प्रौद्योगिकी पर आधारित, उत्पादकता पर ध्यान केन्द्रित करने वाली खेती की ओर एक रणनीतिक बदलाव दिखाता है, जिसमें नए एआई मंच, बढ़ा हुआ मवेशी चिकित्सा बुनियादी ढांचा और मत्स्यपालन, डेयरी और खास फसलों के लिए लक्षित समर्थन शामिल है, जिसका मकसद खेती की आय और निर्यात प्रतिस्पर्धी ताकत बढ़ाना है।
आईसीएआर-केन्द्रीय समुद्री मत्स्यपालन शोध संस्थान के निदेशक, डॉ. ग्रिंसन जॉर्ज ने कहा कि बजट जÞरूरी शुल्क छूट के जÞरिये अपतटीय और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने को बढ़ावा देकर ‘ब्लू इकॉनमी’ के लिए एक रणनीतिक ढांचे की पेशकश करता है।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ”इस कदम से आसपास के संसाधनों पर पारिस्थितिकीय दबाव कम होने की उम्मीद है, साथ ही भारतीय समुद्री खाद्य वस्तुओं के निर्यात की वैश्विक प्रतिस्पर्धी क्षमता में भी काफी बढ़ोतरी होगी।”
समुद्री उत्पाद निर्यात संवर्धन प्राधिकार (एमपीईडीए) के निदेशक, डॉ. राम मोहन एम के ने कहा कि खुले समुद्र में समुद्री मछली पकड़ने पर शुल्क में छूट से निवेश बढ़ेगा और संसाधनों का इस्तेमाल होगा।
हेरिटेज फूड की कार्यकारी निदेशक, ब्राह्मणी नारा ने नए कॉलेजों, अस्पतालों, प्रयोगशालाओं और पैरा-वेट नेटवर्क के जÞरिये 20,000 पेशेवरों द्वारा पशु चिकित्सा क्षमता बढ़ाने का स्वागत किया।
उन्होंने कहा, ”यह सीधे तौर पर उस गंभीर कमी को दूर करता है जिसकी हमने शिकायत की थी जहां 68,000 की संख्या की जगह जÞरूरी 1,10,000-1,20,000 पशु चिकित्सकों के अंतर को कम करना होगा।”
मिल्की मिस्ट डेयरी फूड के सीईओ के रत्नम ने कहा कि प्राथमिक सहकारिता द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले मवेशियों के चारे पर कर कटौती का विस्तार करने और अंतर-सहकारिता लाभांश कराधान को युक्तिसंगत बनाने के उपाय ‘अल्पावधिक राहत से कहीं ज्Þयादा हैं और यह डेयरी किसानों के सामने आने वाली ढांचागत चुनौतियों का समाधान करते हैं।”
गोदरेज एग्रोवेट के प्रबंध निदेशक और सीईओ, सुनील कटारिया ने कहा कि बजट भारत के विकसित भारत की यात्रा में कृषि को एक अहम स्तंभ के बतौर मजÞबूत करता है, जिसमें पशुधन, मछली पालन और इससे जुड़े क्षेत्र पर खास ध्यान दिया गया है।
सीआईएफओआर-आईसीआरएएफ के इंडिया कंट्री निदेशक, मनोज दबास ने कहा कि वित्त मंत्री की वनों की पैदावार वाले सामग्रियों से अलग हटकर नारियल, काजू, चंदन, अगरवुड और अखरोट जैसी खाद्य वस्तुओं की पैदावार के जÞरिये किसानों की आय बढ़ाने की पहल से न सिफर्Þ गांवों की रोजी-रोटी बढ़ेगी, बल्कि देश के लिए दीर्घावधिक पारिस्थितिकी मजबूती भी कायम होगी।
भारत चंदन के मामले में आॅस्ट्रेलिया के हाथों अपने नेतृत्वकारी भूमिका को गंवा चुका है और उसे अपनी पिछली हैसियत वापस पाने की जÞरूरत है, जो पहले उदासीनता और दूर की सोच की कमी के कारण खो गई थी।
अगरवुड एक अधिक राजस्व देने वाली पेड़ की फसल है जो 27 लाख रुपये प्रति किग्रा तक बिकती है, लेकिन उन्होंने कहा कि इसके लिए इनोक्यूलेशन जैसे उच्च स्तरीय तकनीकी आदानों की जÞरूरत होती है और अगर इसे अच्छी तरह से प्रबंधित किया जाए, तो यह पूर्वोत्तर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदल सकता है।
ईवाई इंडिया भागीदार और लीडर (सामाजिक और दक्षता क्षेत्र) अमित वात्स्यायन ने कहा कि बजट आवंटन आधारित खर्च से बढ़ोतरी-उन्मुख सुधारों की ओर एक रणनीतिक बदलाव दिखाता है।
‘नट एंड ड्राई फ्रूट काउंसिल आॅफÞ इंडिया’ के अध्यक्ष, गुंजन विजय जैन ने काजू, बादाम और अखरोट के लिए खास समर्थन को ‘समय अनुकूल और असरदार’ बताया।
इंसेक्टिसाइड्स (इंडिया) के प्रबंध निदेशक, राजेश अग्रवाल ने नारियल की उत्पादकता बढ़ाने की योजना को खेती की आय बढ़ाने के लिए एक समय पर उठाया गया कदम बताया, ताकि बेकार पेड़ों की जगह ज्Þयादा पैदावार वाली किस्में लगाई जा सकें।
सीएनएच इंडिया के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, नरिंदर मित्तल ने कहा कि बजट इस बात का संकेत देता है कि भारत की खेती का विकास, उत्पादकता और प्रौद्योगिकी नीति आधुनिकीकरण से बढ़ेगा, जिसमें कृत्रिम मेधा (एआई) वाले भारत-विस्तार मंच और सिंचाई के बुनियादी ढांचे में निवेश जैसी पहल शामिल हैं।

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