नयी दिल्ली, 19 जनवरी । दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को उन्नाव बलात्कार मामले की पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत से जुड़े प्रकरण में भाजपा के निष्कासित नेता कुलदीप सिंह सेंगर की 10 साल की सजा को निलंबित करने के अनुरोध वाली याचिका खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा ने कहा, “राहत देने के लिए कोई आधार नहीं है। सजा निलंबित करने के अनुरोध वाली याचिका खारिज की जाती है।” न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यद्यपि सेंगर ने लंबा समय जेल में बिताया है, लेकिन केवल देरी के आधार पर उसे राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि सुनवाई में विलंब का एक कारण स्वयं अपीलकर्ता द्वारा बार-बार दायर किए गए विभिन्न आवेदन रहे हैं।
अदालत ने कहा, “न्यायालय इस तथ्य से अवगत है कि अपीलकर्ता को साढ़े सात वर्षों से अधिक समय से कैद में रहना पड़ा है और अपील की सुनवाई नहीं हो सकी है। हालांकि, सुनवाई में देरी के कारणों में यह भी शामिल है कि अपीलकर्ता ने अंतरिम निलंबन, जमानत अवधि बढ़ाने और सजा के नियमित निलंबन के लिए कई आवेदन दायर किए। यदि अपील के गुण-दोष पर शीघ्र सुनवाई हो, तो उद्देश्य पूरा होगा।”
मामले की अगली सुनवाई तीन फरवरी के लिए सूचीबद्ध की गई है।
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए बलात्कार पीड़िता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से फोन पर बातचीत में संतोष जताया। उन्होंने कहा, “मैं अदालत के फैसले से बहुत खुश हूं। आज मेरे पिता की आत्मा को कुछ शांति मिली है। मैंने अभी तक अपने पिता की तेरहवीं की रस्में भी नहीं की हैं। जब तक उनके हत्यारों को मौत की सजा नहीं मिलती, उनकी आत्मा को सच्ची शांति नहीं मिलेगी।”
न्याय के लिए अपने संघर्ष को जारी रखने का संकल्प दोहराते हुए पीड़िता ने कहा कि उनके साथ हुए यौन उत्पीड़न और उनके पिता की मौत के लिए जिम्मेदार सभी लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा, “कुलदीप सिंह सेंगर, उसके भाई अतुल सिंह सेंगर और इस साजिश में शामिल सभी लोगों को मौत की सजा मिलनी चाहिए। यह सिर्फ मेरी लड़ाई नहीं है, यह न्याय और सच्चाई की लड़ाई है, और मैं इसे अपनी आखिरी सांस तक जारी रखूंगी।”
गौरतलब है कि निचली अदालत ने 13 मार्च 2020 को सेंगर को पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में 10 साल की कैद की सजा सुनाई थी और उस पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। अदालत ने कहा था कि एक परिवार के “इकलौते कमाने वाले” सदस्य की मौत के मामले में किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती।
इसी मामले में सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर और पांच अन्य को भी 10-10 साल की कैद की सजा सुनाई गई थी। पीड़िता के पिता को सेंगर के इशारे पर शस्त्र अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था और नौ अप्रैल 2018 को पुलिस हिरासत में कथित बर्बरता के कारण उनकी मौत हो गई थी।
मुख्य दुष्कर्म मामले में दिसंबर 2019 में सेंगर को नाबालिग लड़की के अपहरण और बलात्कार का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इस फैसले और पीड़िता के पिता की मौत से जुड़े मामले में सेंगर की अपीलें उच्च न्यायालय में लंबित हैं।
उच्च न्यायालय ने 23 दिसंबर 2025 को दुष्कर्म मामले में सेंगर की दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देने वाली अपील लंबित रहने तक उसकी सजा निलंबित कर दी थी, लेकिन इसके बाद शीर्ष अदालत ने 29 दिसंबर 2025 को इस निलंबन पर रोक लगा दी थी।
