मुंबई, 26 फरवरी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यदि पिछले 70 वर्षों में इतिहास को सही ढंग से पढ़ाया गया होता, तो कोई भी मुसलमान मुगल बादशाह औरंगजेब को नायक नहीं मानता। उन्होंने मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज और मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की तुलना करने के प्रयासों की भी कड़ी निंदा की।
विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास की प्रस्तुति संतुलित और तथ्यपरक होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पहले एनसीईआरटी की पुस्तकों में मुगल काल को अधिक स्थान दिया जाता था, जबकि शिवाजी महाराज और मराठा इतिहास को अपेक्षाकृत कम स्थान मिलता था। उनके अनुसार वर्तमान में मराठा इतिहास को पाठ्यक्रम में अधिक विस्तार से शामिल किया गया है।
फडणवीस ने कहा कि वह टीपू सुल्तान के अच्छे या बुरे होने की बहस में नहीं पड़ना चाहते, लेकिन शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान की तुलना का विरोध करते हैं। इससे पहले हर्षवर्धन सपकाल की टिप्पणी पर भी उन्होंने आपत्ति जताई और उसे अनुचित बताया।
मुख्यमंत्री ने स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य किए जाने के निर्णय पर उपजे विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। इस मुद्दे पर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे सहित विभिन्न दलों के विरोध के बाद राज्य सरकार ने फिलहाल इस निर्णय पर रोक लगा दी है।
फडणवीस ने कहा कि यह निर्णय पूर्ववर्ती महा विकास आघाडी सरकार के समय लिया गया था और वर्तमान सरकार ने परिस्थितियों को देखते हुए इसे स्थगित किया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और इतिहास जैसे विषयों पर संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक है।
