इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला में चंद्रग्रहण अवलोकन हेतु विशेष निःशुल्क कार्यक्रम

लखनऊ, 03 मार्च 2026: आज की शाम आकाश में वर्ष का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण दिखाई देगा। यह खगोलीय घटना इसलिए भी खास है क्योंकि पूर्ण अवस्था में चंद्रमा लालिमा लिए दिखाई दे सकता है, जिसे आम भाषा में “ब्लड मून” कहा जाता है। यदि मौसम साफ रहा तो उत्तर भारत के कई हिस्सों सहित लखनऊ में भी इसका अंतिम चरण देखा जा सकेगा।

इसी अवसर पर इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला द्वारा आम जनमानस के लिए विशेष रात्रि आकाश दर्शन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत टेलिस्कोप के माध्यम से चंद्रग्रहण का प्रत्यक्ष अवलोकन कराया जाएगा। यह कार्यक्रम निःशुल्क होगा और इसका आयोजन उत्तर प्रदेश अमेच्योर एस्ट्रोनॉमर्स क्लब के सहयोग से किया जा रहा है।

लखनऊ में ग्रहण की स्थिति

भारत के अधिकांश हिस्सों में चंद्रमा उदित होते समय ग्रहण पहले से जारी रहेगा। लखनऊ में सूर्यास्त का समय शाम 6:08 बजे है, जिसके बाद चंद्रमा पूर्व दिशा में क्षितिज के निकट दिखाई देगा। उस समय तक पूर्ण चरण समाप्त हो चुका होगा, लेकिन आंशिक चरण जारी रहेगा। इस दौरान चंद्रमा हल्की धुंधलाहट या लालिमा लिए दिखाई दे सकता है। लखनऊ से चंद्रग्रहण को देखने की अधिकतम संभावित अवधि लगभग 39 मिनट आंकी गई है। कार्यक्रम सायंकाल से रात्रि 7:00 बजे तक संचालित किया जाएगा।

लखनऊ में चंद्रग्रहण का समय

सूर्यास्त – 18:08 बजे

उपछाया ग्रहण प्रारंभ – 14:14 बजे

आंशिक ग्रहण प्रारंभ – 15:20 बजे

पूर्ण ग्रहण प्रारंभ – 16:34 बजे

पूर्ण ग्रहण अवधि – 59 मिनट

पूर्ण ग्रहण समाप्त – 17:33 बजे

आंशिक ग्रहण समाप्त – 18:47 बजे

उपछाया ग्रहण समाप्त – 19:53 बजे

क्यों दिखता है ‘ब्लड मून’?

चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। पूर्णिमा की रात ही यह घटना संभव होती है। जब पृथ्वी सूर्य के प्रकाश को सीधे चंद्रमा तक पहुंचने से रोकती है, तब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल से होकर मुड़ता और छनता हुआ चंद्रमा तक पहुंचता है। वायुमंडल नीली रोशनी को अधिक बिखेर देता है और लाल रोशनी को आगे बढ़ने देता है। इसी कारण पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा लालिमा लिए दिखाई देता है।

विशेषज्ञों के अनुसार चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा से लगभग 5 डिग्री झुकी हुई है, इसलिए हर पूर्णिमा पर ग्रहण नहीं लगता। केवल तब, जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं, ग्रहण संभव होता है।

इस प्रकार 3 मार्च 2026 का यह पूर्ण चंद्र ग्रहण खगोल प्रेमियों और आम नागरिकों के लिए एक अनूठा अवसर होगा, जिसे देखने के लिए नक्षत्रशाला ने विशेष व्यवस्था की है।

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