नयी दिल्ली, 21 जनवरी । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर दलितों और अन्य समुदायों को उनकी आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व न देने को लेकर विरोधाभासी रुख अपनाने का आरोप लगाया है। पार्टी ने कहा कि सामाजिक न्याय को लेकर राहुल गांधी के बयान और उनकी पार्टी की आंतरिक हकीकत के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।
भाजपा की यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो के बाद आई है, जिसमें पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी कांग्रेस के अनुसूचित जाति (एससी) प्रकोष्ठ की बैठक के दौरान पार्टी में दलितों को अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग करते नजर आ रहे हैं।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा कि चन्नी की टिप्पणियों ने राहुल गांधी के कथनों और उनके अमल के बीच के अंतर को उजागर कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी सामाजिक न्याय और “जितनी आबादी, उतनी भागीदारी” की बात तो करते हैं, लेकिन अपनी ही पार्टी में इन सिद्धांतों को लागू करने में विफल रहे हैं।
पूनावाला ने कहा, “राहुल गांधी ओबीसी, एससी, एसटी और जातिगत जनगणना की बात करते हैं, लेकिन उनके सिद्धांत और उनकी राजनीति में जमीन-आसमान का फर्क है। जब उनकी ही पार्टी के नेता चरणजीत सिंह चन्नी, जो स्वयं अनुसूचित जाति से आते हैं, यह कह रहे हैं कि उनके समुदाय को न्याय नहीं मिल रहा, तो यह कांग्रेस की सच्चाई को दर्शाता है।”
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि पंजाब में अनुसूचित जातियों की बड़ी आबादी होने के बावजूद कांग्रेस ने पार्टी संगठन और नेतृत्व में उन्हें आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व नहीं दिया। उन्होंने राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि उनके सिद्धांत “हाथी के दांत दिखाने के और, खाने के और” जैसे हैं।
पूनावाला ने चन्नी के बयान को कांग्रेस में बढ़ती आंतरिक कलह का संकेत बताते हुए कहा कि पार्टी पंजाब, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा समेत कई राज्यों में अंदरूनी संघर्ष से जूझ रही है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “राहुल कांग्रेस बनाम प्रियंका कांग्रेस की लड़ाई चल रही है। कांग्रेस एक भ्रमित पार्टी बन चुकी है और राहुल गांधी के नेतृत्व में यह और बिखरती जाएगी।”
भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सामाजिक न्याय के मुद्दे को केवल राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करती है, जबकि पार्टी के भीतर ही दलितों और पिछड़े वर्गों को उनका उचित हक नहीं मिल पा रहा है।
