लखनऊ, 07 अप्रैल 2026। उत्तर प्रदेश सरकार ने सामाजिक न्याय और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम उठाते हुए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘डॉ. आंबेडकर मूर्ति विकास योजना’ को स्वीकृति प्रदान की गई।
इस योजना का उद्देश्य डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित समाज सुधार और सामाजिक न्याय के लिए योगदान देने वाले महापुरुषों की प्रतिमाओं का संरक्षण, सौंदर्यीकरण और विकास करना है। योजना के तहत सरकारी भूमि, नगर निकायों और पंचायतों में स्थापित प्रतिमाओं के आसपास छतरी, बाउंड्री वॉल, प्रकाश व्यवस्था, हरियाली और अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। प्रत्येक प्रतिमा स्थल के लिए अधिकतम 10 लाख रुपये तक की राशि स्वीकृत की जाएगी।
सरकार ने प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं के लिए प्रति विधानसभा 1 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है, जिससे कुल 403 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस योजना के तहत हर विधानसभा में लगभग 10 प्रतिमाओं का कायाकल्प किया जाएगा। पहले चरण में 31 दिसंबर 2025 तक स्थापित प्रतिमाओं को शामिल किया गया है।
योजना में संत रविदास, संत कबीरदास, ज्योतिबा फुले और महर्षि वाल्मीकि जैसे महान समाज सुधारकों की प्रतिमाओं को भी प्राथमिकता दी जाएगी। 14 अप्रैल को प्रदेशभर में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर जनप्रतिनिधि इस योजना की जानकारी जनता को देंगे।
वहीं, परिवहन क्षेत्र में भी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के 49 बस स्टेशनों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर विकसित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह विकास डीबीएफओटी मॉडल के तहत किया जाएगा, जिससे बस स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा सके।
परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि इन बस स्टेशनों पर शॉपिंग मॉल, फूड कोर्ट और अन्य अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए तकनीकी योग्यता और समय सीमा में भी छूट दी गई है।
इसके साथ ही बुलंदशहर के नरौरा, बलरामपुर की तुलसीपुर और हाथरस के सिकंद्राराऊ में बस स्टेशन निर्माण के लिए सरकारी भूमि नि:शुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं से न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
प्रदेश सरकार के ये फैसले जहां एक ओर महापुरुषों के सम्मान और सामाजिक समरसता को मजबूत करेंगे, वहीं दूसरी ओर बुनियादी ढांचे के विकास और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देंगे।
