नयी दिल्ली, 23 मार्च । पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय ध्वज वाले दो और एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर भारत के लिए रवाना हो गए हैं। इन जहाजों के अगले दो से ढाई दिन में भारतीय बंदरगाह पर पहुंचने की संभावना है।
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने सोमवार को बताया कि ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ नामक दोनों टैंकर सोमवार सुबह फारस की खाड़ी से रवाना हुए और जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। दोनों जहाजों पर लगभग 92,000 टन एलपीजी लदी हुई है, जो देश में लगभग एक दिन की खाना पकाने की गैस की खपत के बराबर है।
अधिकारियों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र से भारत तक पहुंचने में जहाजों को सामान्यतः दो से ढाई दिन का समय लगता है। जहाज ट्रैकिंग आंकड़ों से संकेत मिलता है कि जलडमरूमध्य पार करने से पहले दोनों टैंकर ईरान के लारक और क़ेशम द्वीपों के बीच स्थित जलक्षेत्र से होकर गुजरे, जहां पहचान सत्यापन की प्रक्रिया अपनाई गई।
इससे पहले एलपीजी लेकर आने वाले एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी सुरक्षित रूप से भारतीय तट पर पहुंच चुके हैं। इनमें से एक जहाज 16 मार्च को मुंदड़ा बंदरगाह और दूसरा 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पहुंचा था।
गौरतलब है कि अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले और उसके बाद ईरान के पलटवार के कारण पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई। उस समय इस क्षेत्र में 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद थे, जिनमें से कुछ अभी भी वहां फंसे हुए हैं।
सरकार का कहना है कि क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा उन्हें सुरक्षित मार्ग दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, क्योंकि देश के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और एलपीजी इसी रास्ते से आयात किया जाता है।
