कोलकाता, 17 मार्च। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने 294 में से 291 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। पार्टी ने इस बार चर्चित चेहरों के बजाय संगठनात्मक पकड़ रखने वाले नेताओं पर दांव लगाया है।
टीएमसी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कालीघाट स्थित आवास से सूची जारी करते हुए भरोसा जताया कि पार्टी 226 से अधिक सीटें जीतकर लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी करेगी। उन्होंने बताया कि दार्जिलिंग क्षेत्र की तीन सीटें सहयोगी भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा के लिए छोड़ी गई हैं, जिसका नेतृत्व अनित थापा कर रहे हैं।
इस चुनाव की सबसे चर्चित लड़ाई भवानीपुर सीट पर होगी, जहां ममता बनर्जी का मुकाबला भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी से होगा। 2021 में नंदीग्राम में दोनों के बीच हुए कड़े मुकाबले के बाद यह एक और हाई-प्रोफाइल टकराव माना जा रहा है।
पार्टी ने 291 उम्मीदवारों में से 135 मौजूदा विधायकों को दोबारा मौका दिया है, जबकि करीब 75 विधायकों के टिकट काटे गए हैं और 15 को सीट बदलकर उतारा गया है। इसे सत्ता-विरोधी लहर से निपटने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
टीएमसी ने अपने कई वरिष्ठ मंत्रियों—फरहाद हकीम, जावेद अहमद खान, अरूप बिस्वास, इंद्रनील सेन और चंद्रिमा भट्टाचार्य—को उनके मौजूदा क्षेत्रों से फिर मैदान में उतारा है। वहीं कुछ बड़े नामों जैसे चिरंजीत चक्रवर्ती, पार्थ चटर्जी और परेश पाल को इस बार टिकट नहीं दिया गया।
उम्मीदवारों की सूची में नए और विविध पृष्ठभूमि के चेहरों को भी शामिल किया गया है। एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता स्वप्ना बर्मन को राजगंज से टिकट मिला है, जबकि पूर्व क्रिकेटर शिव शंकर पाल को तूफानगंज से उम्मीदवार बनाया गया है। अभिनेता-नेता सोहम चक्रवर्ती तेहट्टा से चुनाव लड़ेंगे और पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष को बेलियाघाटा से मैदान में उतारा गया है।
पार्टी के अनुसार, कुल उम्मीदवारों में 52 महिलाएं, 95 अनुसूचित जाति/जनजाति और 47 अल्पसंख्यक समुदाय से हैं, जो सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश को दर्शाता है।
टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस बार फोकस “स्टार पावर” के बजाय जमीनी पकड़, बूथ प्रबंधन और स्थानीय नेटवर्क पर है। यही कारण है कि कई जगहों पर संगठन से जुड़े चेहरों को प्राथमिकता दी गई है।
नंदीग्राम सीट पर भी टीएमसी ने रणनीतिक बदलाव करते हुए पूर्व भाजपा नेता पबित्र कर को मैदान में उतारा है। 2021 में इसी सीट पर ममता बनर्जी को मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा था।
कुल मिलाकर, उम्मीदवारों की इस सूची से साफ है कि टीएमसी इस चुनाव में संगठनात्मक मजबूती और स्थानीय समीकरणों के दम पर सत्ता बरकरार रखने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
