लखनऊ। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लखनऊ स्थित एमिटी विश्वविद्यालय में आयोजित चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि वैज्ञानिकों के शोध और नवाचार से खाद्य सुरक्षा की कड़ी और मजबूत होगी।
‘पैथोजेन्स, प्लांट हेल्थ एंड फूड सिक्योरिटी: क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर एंड लैंडस्केप कंजर्वेशन’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एक मंच पर जुटे हैं, जहां सतत कृषि और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर मंथन किया जा रहा है।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि में वैल्यू एडिशन और आधुनिक तकनीक के समन्वय से किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि भंडारण, कोल्ड चेन, प्रसंस्करण और प्रभावी विपणन से भी जुड़ी हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में अपार कृषि संभावनाएं होने के बावजूद भंडारण और प्रसंस्करण की कमी के कारण किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता। ऐसे में वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को ऐसी तकनीक विकसित करनी चाहिए, जिससे फसलें प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रह सकें।
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ने ‘प्लांट हेल्थ एंड फूड सिक्योरिटी’ पुस्तक का विमोचन किया और विभिन्न संस्थानों से आए वैज्ञानिकों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया।
सम्मेलन का आयोजन एमिटी फूड एंड एग्रीकल्चर फाउंडेशन और इंडियन सोसाइटी ऑफ माइकोलॉजी एंड प्लांट पैथोलॉजी के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
इस अवसर पर डॉ. अशोक के. चौहान, डॉ. असीम चौहान सहित कई वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने अपने विचार रखे। विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन, पादप रोग, कीटनाशक प्रभाव और पोषण सुरक्षा जैसे विषयों पर गहन चर्चा की।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसमें वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
चार दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में कृषि, पादप स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा, जिससे भविष्य की चुनौतियों के समाधान तलाशने में मदद मिलेगी।
