नई दिल्ली, 15 फरवरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय उद्योग जगत से साहसपूर्वक निवेश बढ़ाने और नवाचार-आधारित वैश्विक प्रतिस्पर्धा को गति देने का आह्वान किया है। प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई)-भाषा को दिए एक विशेष साक्षात्कार में प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने संरचनात्मक कमियों को दूर कर विकसित भारत की मजबूत नींव रखी है और अब वृद्धि के अगले चरण में निजी क्षेत्र की निर्णायक भूमिका आवश्यक है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में पूंजीगत व्यय बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया गया है, जो 2013 की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक है। उनके अनुसार यह निवेश बुनियादी ढांचे के विस्तार, लॉजिस्टिक्स सुदृढ़ीकरण और उभरते क्षेत्रों को प्रोत्साहन देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
उन्होंने बताया कि बजट में रेलवे, सड़क, डिजिटल और ऊर्जा अवसंरचना पर विशेष जोर दिया गया है। साथ ही, अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाने और ऋण प्रवाह बढ़ाने जैसे कदम उठाए गए हैं, जिन्हें रोजगार सृजन और आर्थिक गति बढ़ाने के प्रमुख साधन के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने निजी क्षेत्र से अनुसंधान एवं विकास में अधिक निवेश, नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने और आपूर्ति श्रृंखला क्षमता को मजबूत करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा केवल प्रोत्साहनों या शुल्क लाभों से नहीं, बल्कि नवाचार, दक्षता और उत्पादकता से सुनिश्चित होती है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि उत्पादकता वृद्धि के लाभ कर्मचारियों, निवेशकों और प्रबंधन के बीच न्यायसंगत रूप से साझा होने चाहिए। उनके अनुसार बढ़ती वास्तविक मजदूरी, कौशल उन्नयन और स्थिर रोजगार न केवल घरेलू मांग को मजबूत करते हैं, बल्कि दीर्घकालिक निवेश के लिए सामाजिक स्वीकृति भी सुनिश्चित करते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने बुनियादी ढांचे, आर्थिक स्थिरता, नियामक सुधार और वैश्विक व्यापारिक पहुंच पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में निर्णायक प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि भारतीय उद्योग नवाचार, दीर्घकालिक क्षमता निर्माण और सामाजिक रूप से जिम्मेदार वृद्धि को कितनी प्राथमिकता देता है।
