नई दिल्ली, 21 मार्च । भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बातचीत की और पश्चिम एशिया में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की निंदा की। उन्होंने नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के महत्व को दोहराया कि जहाजरानी मार्ग खुले और सुरक्षित बने रहें।
ईरान के राष्ट्रपति के साथ बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें ईद और नवरोज की शुभकामनाएं दीं और आशा जताई कि त्योहारों का यह मौसम पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि लेकर आएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से बात की और ईद एवं नवरोज की शुभकामनाएं दीं। हमने आशा व्यक्त की कि त्योहारों का मौसम पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि लाए।”
प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करती हैं। उन्होंने कहा, “नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि जहाजरानी मार्ग खुले और सुरक्षित रहें।”
प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ईरान सरकार द्वारा दिए जा रहे निरंतर सहयोग की भी सराहना की।
मौजूदा संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी और ईरान के राष्ट्रपति के बीच यह दूसरी टेलीफोन वार्ता थी। इससे पहले 12 मार्च को राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री मोदी को ईरान की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी दी थी और क्षेत्र में हाल के घटनाक्रम पर अपना दृष्टिकोण साझा किया था।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में उभरती सुरक्षा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और भारत के इस रुख को दोहराया कि सभी मुद्दों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था, जिसके जवाब में ईरान ने अपने पड़ोसी देशों और इजराइल को निशाना बनाया।
ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को नियंत्रित करता है, जो दुनिया का एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री परिवहन मार्ग है। इसके माध्यम से विश्व के लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा उत्पादों का परिवहन होता है। संघर्ष के बाद से ईरान ने बहुत कम जहाजों को इससे गुजरने की अनुमति दी है।
संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी ने कई देशों के नेताओं से भी बातचीत की है। इनमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस और मलेशिया के नेता शामिल हैं।
