नई दिल्ली, 22 मार्च । पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कच्चे तेल, गैस और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के साथ-साथ ऊर्जा एवं उर्वरक क्षेत्रों से संबंधित स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा की। सरकारी सूत्रों के अनुसार बैठक का मुख्य उद्देश्य देशभर में आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति और कुशल वितरण सुनिश्चित करना था।
सूत्रों ने बताया कि सरकार पेट्रोलियम उत्पादों समेत सभी जरूरी संसाधनों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठा रही है, ताकि वैश्विक संकट का असर आम नागरिकों और उद्योगों पर कम से कम पड़े। बैठक में पश्चिम एशिया क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न वैश्विक परिस्थितियों और आपूर्ति श्रृंखला में आ रही चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव सहित कई वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए।
इसके अलावा बंदरगाह एवं जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर, खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्री प्रह्लाद जोशी, नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा तथा शक्तिकांत दास भी बैठक में मौजूद रहे।
सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर वैश्विक स्तर पर दबाव बढ़ा है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने से स्थिति और गंभीर हो गई है, क्योंकि इस समुद्री मार्ग से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति होती है। ईरान द्वारा इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या सीमित किए जाने से भारत समेत कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले 12 मार्च को कहा था कि पश्चिम एशिया में युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा संकट की स्थिति पैदा कर दी है, जो किसी भी देश के लिए एक गंभीर परीक्षा है। उन्होंने कहा था कि सरकार अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में उत्पन्न व्यवधानों से निपटने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी विकल्पों पर काम किया जा रहा है।
गौरतलब है कि अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हमले के बाद शुरू हुए इस संघर्ष ने पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस, मलेशिया, इजराइल और ईरान सहित कई देशों के नेताओं से बातचीत कर स्थिति पर चर्चा की है।
