लखनऊ, 17 मार्च , RNN । उत्तर प्रदेश के भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग ने राजस्व प्रबंधन को सुदृढ़ करने और विभागीय कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। विभाग की सचिव एवं निदेशक माला श्रीवास्तव ने बताया कि इन पहलों का उद्देश्य राजस्व वृद्धि के साथ-साथ जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि शासन द्वारा निर्धारित राजस्व लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए निदेशालय स्तर पर विभिन्न मदों के अनुसार नोडल अधिकारियों को नामित किया गया है। ये अधिकारी अलग-अलग स्रोतों से होने वाली आय का विश्लेषण कर राजस्व संग्रहण को बेहतर बनाने में भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही क्षेत्रीय कार्यालयों के अंतर्गत आने वाले जिलों में राजस्व प्राप्ति की नियमित समीक्षा के लिए भी नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं।
खनिजों के अंतरराज्यीय परिवहन को लेकर भी नई व्यवस्था लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है। निर्देश दिए गए हैं कि अन्य राज्यों से उत्तर प्रदेश में आने वाले खनिजों के लिए परिवहन प्रपत्र जारी होने के समय ही आईएसटीपी (Inter State Transit Pass) की धनराशि जमा कराई जाए, जिससे राजस्व संग्रहण की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी हो सके।
विभाग ने तकनीकी सुधार और आधुनिक निगरानी तंत्र पर भी जोर दिया है। अवैध खनन पर नियंत्रण के लिए आईटी और आईओटी आधारित प्रणालियों के अध्ययन हेतु विभागीय टीम को गुजरात भेजा गया, जहां आधुनिक निगरानी तंत्र का अध्ययन किया गया। वहीं ऑनलाइन मार्केट सिस्टम की कार्यप्रणाली समझने के लिए टीम को तेलंगाना भेजा गया है।
माला श्रीवास्तव ने बताया कि इन राज्यों से प्राप्त अनुभवों को उत्तर प्रदेश में लागू कर खनन कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाने और राजस्व में वृद्धि करने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा विभागीय अधिकारियों को राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी शामिल किया जा रहा है।
अधिकारियों ने खान मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की बैठकों और छत्तीसगढ़ में आयोजित क्षेत्रीय परिषद की बैठक में भाग लेकर महत्वपूर्ण अनुभव हासिल किए हैं।
विभाग का मानना है कि इन पहलों से न केवल राजस्व संग्रहण में वृद्धि होगी, बल्कि खनन गतिविधियों में पारदर्शिता और निगरानी भी मजबूत होगी, जिससे अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।
