ममता बनाम शुभेंदु: नंदीग्राम के बाद अब भवानीपुर में ‘प्रतिष्ठा की जंग’

कोलकाता, 17 मार्च। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हाई-वोल्टेज मुकाबला देखने को मिलेगा। 2021 विधानसभा चुनाव में सुर्खियों में रही नंदीग्राम की टक्कर अब भवानीपुर में दोहराई जाएगी, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सामना भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी से होगा।

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी इस बार भवानीपुर सीट से चुनाव मैदान में हैं, जबकि भाजपा ने विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी को उनके खिलाफ उतारकर इस सीट को प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दिया है। दोनों नेताओं के आमने-सामने होने से यह मुकाबला राज्य का सबसे चर्चित चुनावी संघर्ष माना जा रहा है।

गौरतलब है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को महज 1,956 वोटों के अंतर से हराया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने भवानीपुर सीट से उपचुनाव जीतकर विधानसभा में वापसी की थी। भवानीपुर को उनका मजबूत गढ़ माना जाता है।

पांच साल बाद फिर से दोनों नेताओं के आमने-सामने आने से राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। ममता बनर्जी ने भरोसा जताया है कि इस बार वह भवानीपुर से रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज करेंगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा द्वारा शुभेंदु अधिकारी को भवानीपुर से उतारना एक रणनीतिक कदम है, जिससे इस सीट को प्रतीकात्मक ‘युद्धक्षेत्र’ बनाया जा सके और नंदीग्राम जैसा परिणाम दोहराने की कोशिश की जा सके।

वर्ष 2011 में सत्ता में आने के बाद से भवानीपुर तृणमूल कांग्रेस का मजबूत शहरी गढ़ रहा है। यह ममता बनर्जी का राजनीतिक आधार क्षेत्र भी है। 2021 में उनके नंदीग्राम से हारने के बाद तृणमूल नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने यह सीट खाली की थी, जहां से ममता ने उपचुनाव में 58 हजार से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी।

इस बार चुनाव में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ने नया राजनीतिक आयाम जोड़ दिया है। भवानीपुर में 47,000 से अधिक नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जो 2021 के उपचुनाव में ममता की जीत के अंतर से काफी करीब है।

ऐसे में भवानीपुर का यह चुनाव सिर्फ एक सीट का मुकाबला नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में वर्चस्व की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।

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