करदाताओं का जीवन आसान बनाएं, चोरी पर तकनीक से लगाएं लगाम: निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली, 20 मार्च । वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर अधिकारियों से करदाताओं का जीवन आसान बनाने और जानबूझकर कर चोरी करने वालों को पकड़ने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी का प्रभावी इस्तेमाल करने का आह्वान किया है।

उन्होंने ‘प्रारंभ 2026: आयकर अधिनियम 2025 जागरूकता अभियान’ को संबोधित करते हुए विश्वास जताया कि 1 अप्रैल से लागू होने वाला नया आयकर अधिनियम, 2025 भारत को एक अधिक कर-अनुकूल देश बनाने में मदद करेगा।

वित्त मंत्री ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा, “कर भुगतान को इतना आसान बनाइए कि ईमानदारी स्वाभाविक विकल्प बन जाए। लेकिन जो जानबूझकर चोरी करते हैं, उन्हें तकनीक के जरिए पकड़ा जाएगा। ईमानदार करदाता के लिए व्यवस्था सरल होगी, जबकि कर चोरी करने वालों के लिए सख्त।”

उन्होंने आयकर अधिकारियों से देशभर में स्थानीय भाषाओं में जागरूकता अभियान चलाने का आग्रह किया, ताकि नए कानून की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके। यह अभियान प्रिंट, रेडियो, टीवी, डिजिटल और सोशल मीडिया जैसे विभिन्न माध्यमों के जरिए चलाया जा रहा है।

गौरतलब है कि संसद ने 12 अगस्त 2025 को छह दशक पुराने आयकर अधिनियम 1961 की जगह नया आयकर अधिनियम, 2025 पारित किया था। नए कानून में कर दरों में बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि भाषा को सरल और स्पष्ट बनाया गया है।

निर्मला सीतारमण ने अधिकारियों से मुकदमेबाजी कम करने, करदाताओं के समय का सम्मान करने और संवाद को बेहतर बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “आप केवल कर संग्रहकर्ता नहीं, बल्कि सरकार और करदाता के बीच भरोसे का प्रतीक हैं। करदाता आपका विरोधी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का भागीदार है।”

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मानवीय’ दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल मानव-केंद्रित डिजिटल युग के अनुरूप है, जिसमें जवाबदेह शासन, समावेशी तकनीक और पारदर्शिता को बढ़ावा दिया जा रहा है।

वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि नई अनुमानित कराधान योजना को मजबूत किया गया है, जिससे एमएसएमई क्षेत्र को बड़ी राहत मिलेगी।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आयकर विभाग की नई और आधुनिक वेबसाइट भी लॉन्च की और संसदीय समिति का आभार व्यक्त किया, जिसने विधेयक की समीक्षा कर 196 में से 184 सिफारिशों को शामिल करने में योगदान दिया।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने मानसिकता में बदलाव पर जोर देते हुए कहा कि अब समय है “नई सोच और नई व्यवस्था” के साथ आगे बढ़ने का, ताकि कर प्रणाली सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बन सके।

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